उत्तराखंड डेली न्यूज:ब्योरो
यूपीईएस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने शांति-आधारित विकास मॉडल पर वैश्विक सहमति को दिया नया आयाम वैश्विक नेताओं ने यूपीईएस में शांति, समानता और सततता के माध्यम से विकास की नई दिशा पर किया मंथन
किया, जिसमें शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेता , सामाजिक नवाचारकर्ताओं, कलाकारों और विद्यार्थियों की विशिष्ट भागीदारी रही। सम्मेलन में शांति, सततता और समावेशी विकास के गहरे संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई। यह सम्मेलन ऐसे समय में वैश्विक संवाद और ठोस कार्यवाही का मंच बना, जब सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ लगातार एक-दूसरे से जुड़ती जा रही हैं।इस विचार पर आधारित कि स्थायी विकास केवल न्याय, संस्थागत ईमानदारी और सामाजिक सौहार्द की उपस्थिति में ही संभव है, आईसीएसपीजी 2026 ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेषकर एसडीजी 16, के अनुरूप एकीकृत और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विभिन्न सत्रों में इस बात को दोहराया गया कि मजबूत और उत्तरदायी संस्थानों का निर्माण तथा समावेशी समाजों को बढ़ावा देना दीर्घकालिक समृद्धि की अनिवार्य शर्त है।सम्मेलन का उद्घाटन डॉ. सुनील राय, कुलपति, यूपीईएस द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. राय ने विकास के मौजूदा प्रतिमानों पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सतत विकास की आधारशिला शांति, समानता और मजबूत संस्थागत ढांचे पर आधारित होनी चाहिए, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकें। उन्होंने कहा, “सतत शांति कोई अमूर्त आकांक्षा नहीं है; यह वह आधार है जिस पर सार्थक और समावेशी विकास का निर्माण होना चाहिए। ऐसे समय में जब विश्व जटिल सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी परिवर्तनों से गुजर रहा है, संस्थानों को ऐसे मंच तैयार करने चाहिए जहाँ ज्ञान, संस्कृति, नीति और नवाचार एक साथ आएँ। आईसीएसपीजी 2026 संवाद को कार्यवाही में बदलने तथा अधिक सशक्त, समानतापूर्ण और शांतिपूर्ण समाजों के निर्माण हेतु विचारों को बढ़ावा देने की यूपीईएस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”डॉ. राम शर्मा, अध्यक्ष, यूपीईएस; मनीष मदान, कुलसचिव, यूपीईएस; तथा डॉ. वीणा दत्ता, वाइस प्रो-वोस्ट, यूपीईएस ने भी कार्यक्रम के दौरान अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सतत प्रथाएँ अपनाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, ताकि पृथ्वी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके, व्यक्तिगत कल्याण में सुधार हो और आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिले।यह सम्मेलन डॉ. अश्विनी नांगिया, अधिष्ठाता अनुसंधान एवं विकास, तथा डॉ. जितेंद्र पांडेय, निदेशक, हिमालयन इंस्टीट्यूट फॉर लर्निंग एंड लीडरशिप (हिल) के नेतृत्व में आयोजित किया गया। यह एक बहु-विषयक मंच के रूप में उभरा, जिसने विविध दृष्टिकोणों को एक साथ लाकर शैक्षणिक विमर्श को व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझावों में परिवर्तित किया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने शोध, नीतिगत चिंतन और जमीनी नवाचारों का सार्थक संगम सुनिश्चित किया।आईसीएसपीजी 2026 में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. सोनल मानसिंह, पद्म विभूषण सम्मानित; डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली, तथा मीनाक्षी गुप्ता, गूंज शामिल रहे। इसके अतिरिक्त डॉ. माधुरी बाथवाल, पद्मश्री सम्मानित; डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पद्म भूषण सम्मानित; डॉ. प्रेम चंद शर्मा, पद्मश्री सम्मानित; डॉ.कल्याण सिंह रावत, पद्मश्री सम्मानित; डॉ. प्रीतम भरतवाण, पद्मश्री सम्मानित; और डॉ. वी. सी. ठाकुर, पद्मश्री सम्मानित की उपस्थिति ने सम्मेलन के विमर्श को और गहराई प्रदान की। यह सहभागिता सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सामाजिक नेतृत्व के समृद्ध संगम को दर्शाती है।सम्मेलन की एक विशिष्ट विशेषता ‘बैरोमीटर्स ऑफ पीस’ शीर्षक से तैयार किया गया अभिनव ढांचा रहा, जिसके अंतर्गत विज्ञान एवं नवाचार, नैतिक प्रौद्योगिकी, प्रदर्शन कला एवं संस्कृति, सुशासन एवं नागरिक सहभागिता, पर्यावरणीय सततता तथा युवा नेतृत्व केंद्रित शिक्षा जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दृष्टिकोण ने विकास के बहुआयामी प्रेरक तत्व के रूप में शांति की समग्र समझ विकसित करने में सहायता की।दो दिनों तक चले सम्मेलन में संस्कृति एवं विरासत, शिक्षा एवं युवा कल्याण, विज्ञान एवं सततता, पर्यावरण एवं अवसंरचना, तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। सम्मेलन में एक नवाचार प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें विभिन्न विषयों से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए गए। इसके साथ ही पोस्टर प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शोधकर्ताओं ने शांति और सततता के संगम पर आधारित वास्तविक चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए।संवाद से आगे बढ़ते हुए, आईसीएसपीजी 2026 ने ठोस और क्रियान्वयन योग्य परिणामों पर विशेष बल दिया। सम्मेलन का समापन “कॉन्फ्रेंस डिक्लेरेशन ऑन सस्टेनेबल पीस फॉर ग्रोथ” के साथ होना निर्धारित है, जिसके साथ नीतिगत सिफारिशें, सहयोगात्मक शोध पहलें तथा प्रकाशन के अवसर भी प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि सम्मेलन के बाद भी इसकी गति और प्रभाव बना रहे।आयोजकों ने कहा कि आईसीएसपीजी 2026, सततता, सांस्कृतिक एकीकरण और जिम्मेदार नवाचार जैसे क्षेत्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को सामाजिक प्रभाव से जोड़ने की यूपीईएस की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि वे अंतर्विषयक सहयोग को और सुदृढ़ करेंगे तथा भारत और वैश्विक स्तर पर सशक्त, समावेशी और शांतिपूर्ण समाजों के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे।

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