उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
सावन का महीना हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है. सदियों से आम राय है कि इस महीने में मांस-मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. यह सिर्फ धार्मिक आस्था की बात नहीं है, साइंस भी मानता है कि सावन में ऐसे भोजन को नहीं खाना चाहिए.सावन में कुछ लोग ऐलान कर देते हैं कि अब वह मीट-मछली और शराब को हाथ नहीं लगाएंगे. इसके पीछे वे धार्मिक तर्क देते हैं कि ये पवित्र महीना है. इसीलिए धार्मिक नजरिए से ये ठीक नहीं. कुछ ऐसे भी होते हैं जो ऐसा नहीं मानते और तामसिक भोजन करते रहते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होता है.दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं होती हैं.सावन का महीना शुरू हो गया है. हिंदू धर्म में इस माह को बेहद खास माना जाता है. सदियों से आम राय है कि इस महीने में मांस-मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. ज्यादातर लोग इसे धार्मिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं. विज्ञान भी इससे इंकार नहीं करता. अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की अलग-अलग रिसर्च में इस बात की पुष्टि की गई है कि सावन में नॉनवेज और शराब हानिकारक होती है. रिसर्च के मुताबिक इस महीने में बारिश की वजह से नमी बढ़ती है, जिससे बैक्टीरिया के पनपते हैं.साइंस का क्या है इस पर नजरिया,सावन में मीट, मछली और शराब को छोड़ने का साइंटिफिक रीजन जीवों के ब्रीडिंग के समय और मौसमी बीमारियों से जुड़ा है. दरअसल ये महीना प्रजनन का माना जाता है. साइंस के मुताबिक अगर आप किसी ऐसे जीव का मांस खाते हैं जो असल में प्रेग्नेंट है तो उससे हमारे शरीर में हार्मोनल डिस्टरबेंस होते हैं. इससे कई तरह की बीमारियां घेर सकती हैं. इसके अलावा इंफेक्शन का खतरा भी होता है. दरअसल ऐसा माना जाता है कि बारिश की वजह से संक्रामक बीमारियां सबसे पहले जीवों को अपना शिकार बनाती हैं. ऐसे में संक्रामक रोग लोगों को भी अपना शिकार बना सकते हैं.आयुर्वेद भी कहता है छोड़ दो मीट और शराब,आयुर्वेद भी साइंस के इस तथ्य को मानता है कि सावन में शराब और मीट को छोड़ देना चाहिए. आुयर्वेद के मुताबिक इस महीने में शरीर की इम्युनिटी बेहद कमजोर हो जाती है. ऐसे में मसालेदार भोजन और नॉनवेज बीमारियों का कारण बन जाते हैं. सावन में सोमवार को जो लोग व्रत रहते हैं, उसे भी इम्युनिटी और पाचन शक्ति से जोड़कर देखा जाता है.
मछली से दूरी क्यों?
मानसून मछलियों के प्रजनन का मौसम माना जाता है.इसी वजह से इस मौसम में मत्स्य विभाग हर साल समुद्र तटीय राज्यों में मछली पकड़ने पर कुछ समय के प्रतिबंध लगाता है, ताकि मछलियों की आबादी को प्रजनन का मौका मिल सके और समुद्री पारिस्थतिकी तंत्र संतुलित रहे.देश में इस बारे में अब तक कई रिसर्च हुए हैं. केरल में हुए ऐसे ही एक रिसर्च में सामने आया कि इस महीने सीफूड के लिए गए नमूमों में 86 प्रतिशत विब्रियो प्रजाति के बैक्टीरिया पाए गए. इसमें गंभीर बीमारी से जुड़े जीन मौजूद थे.सावन में मीट से परहेज क्यों?मीट को सावन में इसलिए खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह पाचन शक्ति को प्रभावित करता है. दरअसल इस मौसम में शरीर की पाचन क्षमता प्रभावित होती है. मीट वसा युक्त होता है, जिसे पचाने में मुश्किल हो सकती है. इसके अलावा मीट का रखरखाव भी बड़ी चुनौती होती है. लंबे समय तक अगर मीट खुले में रखा रखा रहा तो इसमें बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. चिकन पर कैम्पिलोबैक्टर संक्रमण को लेकर एक रिसर्च हुआ, जिसमें पाया गया था कि फार्म से थाली तक आते आते असल में ये बहुत दूषित हो चुका होता है, जो हेल्थ को बिगाड़ता है.
शराब से दूरी जरूरी
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक बारिश के मौसम में शराब का सेवन इम्युनिटी को प्रभावित करता है. इससे बैक्टीरिया और वायरस दोनों शरीर पर हमला कर सकते हैं. एक अन्य रिसर्च में भी बताया गया है कि इस मौसम में शराब का सेवन गट हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है. मानसून में जब बैक्टीरिया और वायरस की मौजूदगी बढ़ी होती है तो यह व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या भी घटा देती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. डिहाइड्रेशन की समस्या होती है और नींद का चक्र बिगड़ जाता है, लिवर पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
