*🌞~ हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 01 फरवरी 2025*
*⛅दिन – शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2081*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – शिशिर*
*🌥️अमांत – 19 गते माघ मास प्रविष्टि*
*🌥️राष्ट्रीय तिथि – 11 माघ मास*
*⛅मास – माघ*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – तृतीया सुबह 11:38 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*⛅नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद रात्रि 02:33 फरवरी 02 तक, तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद*
*⛅योग – परिघ दोपहर 12:25 तक, तत्पश्चात शिव*
*⛅राहु काल – प्रातः 09:51 से प्रातः 11:11 तक*
*⛅सूर्योदय – 07:08*
*⛅सूर्यास्त – 05:53*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:36 से 06:28 तक*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:31 से दोपहर 01:16 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:27 फरवरी 02 से रात्रि 01:10 फरवरी 02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – गणेश जयंती, विनायक चतुर्थी*
*⛅विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है व चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹तिल के औषधीय प्रयोग🔹*
*🔸काले तिल चबाकर खाने व शीतल जल पीने से शरीर की पर्याप्त पुष्टि हो जाती है। दाँत मृत्युपर्यन्त दृढ़ बने रहते हैं।*
*🔸एक भाग सोंठ चूर्ण में दस भाग तिल का चूर्ण मिलाकर 5 से 10 ग्राम मिश्रण सुबह शाम लेने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।*
*🔸तिल का तेल पीने से अति स्थूल (मोटे) व्यक्तियों का वजन घटने लगता है व कृश (पतले) व्यक्तियों का वजन बढ़ने लगता है। यह कार्य तेल के द्वारा सप्तधातुओं के प्राकृत निर्माण से होता है।*
*🔹तैलपान विधिः सुबह 20 से 50 मि.ली. गुनगुना तेल पीकर,गुनगुना पानी पियें। बाद में जब तक खुलकर भूख न लगे तब तक कुछ न खायें।*
*🔸अत्यन्त प्यास लगती हो तो तिल की खली को सिरके में पीसकर समग्र शरीर पर लेप करें।*
*🔸वार्धक्यजन्य हड्डियों की कमजोरी उससे होने वाले दर्द में दर्दवाले स्थान पर 15 मिनट तक तिल के तेल की धारा करें।*
*🔸पैर में फटने या सूई चुभने जैसी पीड़ा हो तो तिल के तेल से मालिश कर रात को गर्म पानी से सेंक करें।*
*🔸पेट मे वायु के कारण दर्द हो रहा हो तो तिल को पीसकर, गोला बनाकर पेट पर घुमायें।*
*🔹वातजनित रोगों में तिल में पुराना गुड़ मिलाकर खायें।**
*🔸एक भाग गोखरू चूर्ण में दस भाग तिल का चूर्ण मिलाके 5 से 10 ग्राम मिश्रण बकरी के दूध में उबाल कर, मिश्री मिला के पीने से षढंता∕नपुंसकता (Impotency) नष्ट होती है।*
*🔸काले तिल के चूर्ण में मक्खन मिलाकर खाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) नष्ट हो जाती है।*
*🔹तिल की मात्राः 10 से 25 ग्राम ।*
*🔹विशेषः देश, काल, ऋतु, प्रकृति, आयु आदि के अनुसार मात्रा बदलती है। उष्ण प्रकृति के व्यक्ति, गर्भिणी स्त्रियाँ तिल का सेवन अल्प मात्रा में करें। अधिक मासिक-स्राव में तिल न खायें।*
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