उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
मध्य पूर्व में ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने का असर भवन निर्माण सामग्रियों पर भी पड़ा है। हालांकि भवन निर्माण में लगने वाली सीमेंट, मोरंग, सरिया और गिट्टी से अधिक सेनेट्री उत्पादन महंगे हो गए हैं।मध्य पूर्व में ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने का असर भवन निर्माण सामग्रियों पर भी पड़ा है। हालांकि भवन निर्माण में लगने वाली सीमेंट, मोरंग, सरिया और गिट्टी से अधिक सेनेट्री उत्पादन महंगे हो गए हैं। युद्ध के करीब 30 दिनों बाद गैस और पेट्रोलियम पदार्थो के मिलने में संकट से महंगाई और बढ़ गई है। खासकर पीवीसी और सीवीसी के पाइप, पानी की टंकी और पीवीसी की टोटियां बहुत महंगी हो गयी हैं। सेनेट्री उत्पादों में करीब 15 से 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। वहीं गैस किल्लत के कारण भवन को आकर्षक बनाने वाली टाइल्स के दाम भी बढ़ गए हैं।भवन निर्माण में लगने वाली सामाग्रियों सीमेंट, मोरंग, गिट्टी और सरिया के दामों में पिछले महीने 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के कुछ दिन बाद दाम स्थिर रहे। लेकिन गैस और पेट्रोल-डीजल की किल्लत के कारण पिछले कुछ दिनों से निर्माण सामग्री महंगी हुई है। हालांकि युद्ध के कारण गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत का असर मकानों की निर्माण लागत में आया है। शहर के खवासपुरा स्थित एक बिल्डिंग मैटेरियल के फुटकर विक्रेता हैदर कहते हैं कि बाजार में कोई डिमांड ही नहीं है।जो सीमेंट, मोरंग, गिट्टी और सरिया के दाम एक महीने पहले थे, उसमें तेल मिलने में आरही दिक्कत के कारण पांच से 10 रुपए की ही मामूली वृद्धि इसलिए हुई है कि क्योकि भाड़ा बढ़ गया है। गैस किल्लत से परेशान लोग भवन निर्माण से अधिक घर के जरूरी काम निपटाने में लगे हैं, जिससे भवन निर्माण का काम एक तरीके से रुका हुआ है। रामपथ पर नहरबाग में भवन निर्माण सामग्री बेचने वाले अनुपम पांडेय कहते हैं कि कुछ दिनों से जब से पेट्रोल-डीजल मिलने की दिक्कत आ रही है, तब से ही बाहर से आने वाले माल पर भाड़ा बढ़ने के कारण बिल्डिंग मैटेरियल के दाम मामूली रूप से बढ़े हैं।सेनेटरी उत्पादों के दाम 15 से 35% तक बढ़े
अयोध्या में मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का असर सेनेट्री उत्पादों के दामों पर सीधा पड़ रहा है। इसका कारण है कि गैस किल्लत और पेट्रोलियम पदार्थों के मिलने में आ रही समस्या के कारण गुजरात और अन्य प्रदेशों में सीपीवीसी और पीवीसी उत्पाद करने वाली कई यूनिटें बंद हो गयी है। सेनेटरी में मुख्य रूप से बाथरूम और टॉयलेट के उपकरण आते हैं, जिसमें सिरेमिक, पोर्सिलेन, ऐक्रेलिक या स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। इसमें टॉयलेट सीट (वेस्टर्न/इंडियन), वॉश बेसिन, सिस्टर्न (फ्लश टैंक), यूरिनल, बाथटब और शावर ट्रे, पीवीसी और सीवीसी के पाइप तथा पानी की टंकियां भी महंगी हो गयी हैं।इसका असर माल की आवक पर पड़ा भी पड़ रहा है। कंपनियों ने अपने उत्पादों के दामों में 15 से 35 प्रतिशत तक भारी वृद्धि कर दी है। शहर के रिकाबगंज में सेनेट्री सामानो के बेचने वाले व्यापारी अनुराग गुप्ता कहते हैं कि मकान बनाने में नल और प्लंबरिंग का कार्य भी होता है। इसमें सीपीवीसी और पीवीसी के पाइप, पानी की टंकी और ब्रॉस के उत्पाद लगते हैं। लेकिन माल की आवक कम होने और उत्पादन ठप होने के कारण दाम बहुत बढ़ गए हैं। केवल पानी की टंकी के दाम ही एक रुपए प्रति लीटर बढ़े हैं। इसके अलावा नल और पाइप के दाम भी 15 से 35 प्रतिशत तक बढ़े हैं।गैस किल्लत से टाइल्स के दाम आसमान पर,मध्य पूर्व में चल रही जंग के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत का प्रभाव मकान में लगने वाली टाइल्स उत्पादों पर भी बहुत पड़ा है। गैस संकट के कारण टाइल्स बनाने वाली फैक्ट्रियां बंद हो गयी हैं। इसके कारण बाजार में माल या तो आ नहीं रहा है, और जो माले पुरान स्टाक में है, उसमें भी 15 से 20 तक मूल्य वृद्धि हो गयी है। कसाबबाड़ा में टाइल्स के कारोबारी मो. अहमद कहते हैं कि फर्श पर लगने वाली टाइल्स के दाम पुराना स्टाक और नये स्टाक पर 20 रुपए से लेकर 100 रुपए पेटी बढ़ गया है। जमीन की टाइल बड़ी साइज 550 से लेकर 650 रुपए प्रति पेटी बिक रही है। वहीं छोटी टाइल्स 220 से लेकर 240 तक प्रति पेटी है।
