उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के सभी 12 स्टेशन प्रकृति के प्रहरी के रूप में विकसित किए जाएंगे। ये स्टेशन इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के मानकों पर आधारित होंगे, जिनमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जोर दिया जाएगा।ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के सभी 12 स्टेशन स्टेशन प्रकृति के प्रहरी के रूप में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे।विकास और प्रकृति के बीच संतुलन को प्राथमिकता देते हुए रेल विकास निगम लिमिटेड ने इंडियन ग्रीन बिल्डिंग कांउसिल के मानकों के तहत स्टेशनों के निर्माण की रूपरेखा तैयार की है। सभी स्टेशनों में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा बचत पर विशेष जोर दिया गया है। स्टेशनों में प्राकृतिक प्रकाश का ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो, इसके अनुसार डिजायन तैयार किया जा रहा है।सबसे महत्वकांक्षी परियोजनाओं में शामिल,पहाड़ के विकास और सुलभ यातायात के क्षेत्र में सबसे महत्वकांक्षी परियोजनाओं में शामिल ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश में पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बनेगी। 125 किलोमीटर लंबी ब्राड गेज रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित सभी 12 रेलवे स्टेशनों को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल रूप में विकसित किया जाएगा।ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक पूरा क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टिकोट से बेहद संवेदनशील है। भूस्खलन जोन, प्राकृतिक जल स्रोत और बदलते मौसम से पैदा होने वाले खतरों को ध्यान में रखते हुए रेल परियोजना के स्टेशनों के निर्माण से पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव पड़े, इस पर विशेष जोर दिया गया है।परियोजना के स्टेशनों का निर्माण प्रकृति के अनुकूल किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक रोशनी, शुद्ध हवा और सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग हो सके और बिजली की खपत कम से कम हो। यात्रियों को स्वच्छ तथा आरामदायक वातावरण मिल सके, इसके लिए यह सभी कार्य इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आइजीबीसी) के मानकानुसार किये जाएंगे।आरवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार, आईजीबीसी के मानकों को अपनाने से रेल स्टेशनों के निर्माण और संचालन में कार्बन का उत्सर्जन कम से कम होगा और जल व ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा।
वर्षा जल संययन प्ररणाली होगी स्थापित
जलवायु और मौसम चक्र में बदलाव को ध्यान में रखते हुए रेल परियोजना के सभी स्टेशनों पर वर्षा जल संचयन प्राणाली स्थापित की जाएगी। इस व्यवस्था से वर्षा की एक-एक बूंद का संचयन कर उसका लंबे समय तक बेहतर से बेहतर उपयोग किया जाएगा।इसके अलावा, स्टेशनों और रेल की साफ-सफाई में कम से कम पानी का उपयोग हो, इसके लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। यही नहीं, स्टेशनों पर कचरा प्रबंधन पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा, जिससे हवा और वातावरण स्वच्छ रहे।
