उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव से मुलाकात की है.
सरकारी राशन दुकानदार मुफ्त में नहीं करेंगे e-KYC, सरकार के आदेश पर फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन ने जताई नाराजगी,फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव से मुलाकात की है.राज्य के सरकारी राशन दुकानदारों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. दरअसल, राज्य सरकार के द्वारा राशन वितरण के अलावा इन सरकारी राशन दुकानदारों को e-KYC सहित कई कामों की जिम्मेदारी दी गई है. इसके एवज में उन्हें कोई पारिश्रमिक का प्रावधान नहीं किया गया है. ऐसे में फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन झारखंड ने सरकार के इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है. साथ ही स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सरकारी राशन दुकानदारों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करेगी तो राज्य के सभी 25400 दुकानदार हड़ताल पर चले जाएंगे.खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव से मिलने के बाद ईटीवी भारत से परेशानी साझा करते हुए एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव ज्ञानदेव झा ने कहा कि एक तरफ राज्य के राशन दुकानदारों का 13 महीने से कमीशन बकाया है, वहीं दूसरी ओर बगैर कोई पारिश्रमिक का e-KYC करने को कहा जा रहा है. यह कहीं से भी उचित नहीं है. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि कम से कम प्रति e-KYC 20 रुपये देने का प्रावधान हो, तभी राशन दुकानदार यह काम कर सकेंगे.”दंडात्मक कार्रवाई हुई तो कोर्ट जाएंगे”फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार से राशन दुकानदारों की परेशानी को भी समझने का आग्रह किया है, ताकि उनके परिवार का भरण-पोषण हो सके. फेडरेशन के प्रदेश महासचिव ज्ञानदेव झा कहते हैं कि सरकार यदि हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है और एक महीने के अंदर इस पर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं होता है तो कोई भी दुकानदार ई-केवाईसी नहीं करेंगे और उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा.उन्होंने कहा कि इस संबंध में हमें भी विभागीय सचिव से आश्वासन मिला है. उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि इसमें जरूर कुछ सरकारी स्तर पर निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो एसोसिएशन की बैठक में आगे की रणनीति को लेकर निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला और प्रखंड स्तर पर संगठन के द्वारा सरकार को मांगें भेजी जा रही है और आने वाले समय में आंदोलन की रूपरेखा तय की जा रही है.
