उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों से सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने का स्वागत करते हुए इसे पारदर्शी, विश्वसनीय और मजबूत परीक्षा व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक माफिया और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार ने निभाया अपना वादा : पीएम मोदी
राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार लंबे समय से सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि इसके तहत टास्क फोर्स का गठन, फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था, तकनीक का व्यापक उपयोग और राज्यों के सुझावों को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों से केंद्र और राज्य सरकारें पेपर लीक की समस्या से जूझ रही थीं, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट पैदा हो रहा था।
पेपर लीक माफिया पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार समय की मांग है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेपर लीक माफिया और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “पेपर लीक माफिया या देश के बच्चों के भविष्य से खेलने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।”
संसद में चर्चा के बाद पारित हुआ कानून
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा के बाद कठोर प्रावधानों वाला यह विधेयक पारित किया गया है। उन्होंने इसे विश्वस्तरीय परीक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
लोकसभा से बुधवार और राज्यसभा से गुरुवार को पारित यह संशोधन विधेयक अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा।
पेपर लीक पर 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपए तक जुर्माना
संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधानों को और सख्त किया गया है। अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दिया गया है। संगठित अपराधों के मामलों में न्यूनतम सात वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा तथा 10 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोषी सेवा प्रदाताओं पर पांच करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा और उन्हें आठ वर्ष तक सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित कार्यों से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।
दो महीने में जांच और तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का प्रावधान
विधेयक के तहत पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी। जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें प्रतिदिन सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर मामले का निपटारा करेंगी। इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।
हर तरह की परीक्षा धांधली कानून के दायरे में : डॉ. जितेंद्र सिंह
राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में उत्तर कुंजी लीक, उत्तर पुस्तिकाओं और कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर, फर्जी वेबसाइट और एडमिट कार्ड तैयार करना तथा संगठित नकल जैसे सभी अपराध शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं को पारदर्शी, विश्वसनीय और योग्यता आधारित बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा हो सके।
शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का भी किया उल्लेख
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के बाद शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। उन्होंने बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,293 और उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या 51,534 से बढ़कर 64,896 हो गई है। उन्होंने कहा कि एम्स की संख्या सात से बढ़कर 22, मेडिकल कॉलेज 387 से बढ़कर 844, एमबीबीएस सीटें 51,300 से बढ़कर 1.39 लाख और पीजी सीटें 31,000 से बढ़कर 86,300 हो गई हैं।
परीक्षा प्रणाली में पहले से लागू हैं कई सुधार
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार पहले ही ऑनलाइन आवेदन प्रणाली, कई भर्तियों में इंटरव्यू समाप्त करने, प्रोविजनल आंसर-की, साइबर सुरक्षा, आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, एआई आधारित फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, सिग्नल जैमर, शिकायत निवारण प्रणाली और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पुनर्गठन जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है। उन्होंने बताया कि उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की 46 सिफारिशों में से 35 पर अमल किया जा चुका है, जबकि शेष सिफारिशों पर तेजी से कार्य जारी है।
