
उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
विजयदशमी पर रावल ने की कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा, कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन प्रवास पर जाएंगे उद्धव और कुबेर जी
चमोली। विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष सोमवार, 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजयदशमी के अवसर पर मंगलवार को मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार और पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही बदरीनाथ धाम में शीतकालीन कपाट बंद होने की तैयारियों का कार्यक्रम भी तय हो गया है। कपाट बंद होने से पहले 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी।बदरीनाथ के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा की। इस दौरान श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पदाधिकारी, अधिकारी, धर्माधिकारी, वेदपाठी, तीर्थ पुरोहित और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि शीतकाल में भी श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे, इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जाएगा।
12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने से पहले पांच दिनों तक धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न कराई जाएगी।
12 नवंबर: भगवान गणेश की पूजा के साथ पंच पूजाओं का शुभारंभ होगा।
13 नवंबर: आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे।
14 नवंबर: खड्ग-पुस्तक पूजन के साथ वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा।
15 नवंबर: माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा और भगवान बदरीविशाल के दरबार में विराजमान होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
16 नवंबर: माता लक्ष्मी गर्भगृह में विराजमान होंगी। भगवान कुबेर और उद्धव जी मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। इसके बाद रात 9 बजकर 37 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
17 नवंबर से शुरू होगा शीतकालीन प्रवास
कपाट बंद होने के अगले दिन 17 नवंबर को भगवान उद्धव और कुबेर जी की उत्सव डोलियां योग बदरी मंदिर, पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी। शीतकाल में दोनों देवताओं की पूजा यहीं संपन्न होगी।
भगवान गरुड़ जी सीधे ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। वहीं, बदरीनाथ के रावल और नायब रावल आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे। 18 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी। इसके साथ ही वर्ष 2026 की बदरीनाथ धाम यात्रा का समापन हो जाएगा।
केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट भी होंगे बंद
चारधाम यात्रा के तहत अन्य धामों के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित की गई हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर सुबह 8:30 बजे बंद होंगे। यमुनोत्री धाम के कपाट भी 11 नवंबर को बंद किए जाएंगे। वहीं, गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के अवसर पर शीतकाल के लिए बंद होंगे।
भंडार व्यवस्था के लिए सौंपी पगड़ी
विजयदशमी के अवसर पर बीकेटीसी की ओर से यात्रा वर्ष 2027 के लिए बदरीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था के संचालन को लेकर भी परंपरागत प्रक्रिया पूरी की गई। मेहता थोक से उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को पगड़ी भेंट की गई।
इससे पहले मंदिर परिसर में नवरात्र और उर्वशी माता की पूजा-अर्चना का हवन-यज्ञ के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, सोहन सिंह रांगड़, पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार, पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, डॉ. हरीश गौड़, पंडा पंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, माणा गांव के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हक-हकूकधारी संगठनों के प्रतिनिधि और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

