उत्तराखंड डेली न्यूज़:ब्यूरो
देहरादून:- श्री हर्ष कुमार की प्रथम पुस्तक ‘यादों का झुरमुट’ का लोकार्पण पटेल नगर, देहरादून स्थित Clarksinn Hotel में गरिमामय समारोह में किया गया। यह पुस्तक श्री हर्ष कुमार की जीवन-यात्रा, वर्षों के अनुभवों, बीती हुई स्मृतियों, रिश्तों, भावनाओं और जीवन के विभिन्न पड़ावों को साहित्यिक रूप में संजोने का प्रयास है। पुस्तक में कविता एवं गद्य के माध्यम से उन अनुभवों और यादों को अभिव्यक्त किया गया है, जो समय बीतने के बाद भी मन में अपनी जगह बनाए रखते हैं। लेखक ने अपने जीवन में देखे-सुने और महसूस किए विभिन्न प्रसंगों को सहज, आत्मीय और भावनात्मक अंदाज में शब्दों का रूप दिया है। ‘यादों का झुरमुट’ पाठकों को जीवन के उन पलों से जोड़ने का प्रयास करती है, जिनमें बीते समय की खुशियां, संघर्ष, रिश्तों की गर्माहट और अनुभवों की सीख समाहित है। हर्ष कुमार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से भू-विज्ञान में स्नातक तथा रुड़की विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग, लखनऊ में भू-वैज्ञानिक के रूप में की। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग, देहरादून में अपनी सेवाएं दीं और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। उनकी पहली पुस्तक ‘यादों का झुरमुट’ उनके जीवन के लंबे अनुभवों और स्मृतियों को एक पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने का उनका पहला साहित्यिक प्रयास है।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि डॉ. अतुल शर्मा रहे। डॉ. शर्मा उत्तराखंड के प्रसिद्ध जनकवि एवं साहित्यकार हैं और अपने जनगीतों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों तथा जनआंदोलनों को स्वर देने के लिए जाने जाते हैं। चिपको आंदोलन, उत्तराखंड आंदोलन और नदी बचाओ जैसे आंदोलनों से जुड़े उनके गीतों ने व्यापक लोकप्रियता प्राप्त की है। साहित्य के साथ-साथ सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर श्री हर्ष कुमार की पत्नी श्रीमती प्रतिभा सिंह, पुत्री स्वस्ति, दामाद मयंक एवं पौत्री माही सहित उनके रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक और समाज के अनेक परिचित लोग उपस्थित रहे। सभी ने श्री हर्ष कुमार को उनकी प्रथम पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं दीं और ‘यादों का झुरमुट’ के सफल प्रकाशन की सराहना की। समारोह का वातावरण आत्मीय, भावपूर्ण और स्मृतियों से जुड़ा हुआ रहा तथा उपस्थित लोगों ने लेखक के इस साहित्यिक प्रयास को उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
