उत्तराखंड डेली न्यूज़ :ब्यूरो
तथा सामान्य रूप से सांस नहीं ले सकता। ऐसी स्थिति में तत्काल CPR और उपलब्ध होने पर AED का उपयोग जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। समाज में अधिक से अधिक लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण मिले तो आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले सहायता की क्षमता बढ़ सकती है। स्कूलों, कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों में प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण को बढ़ावा देना उपयोगी कदम हो सकता है।
आधुनिक चिकित्सा ने बदली उपचार की तस्वीर
हृदय रोगों के उपचार में पिछले दशकों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आधुनिक कार्डियोलॉजी में दवाओं के साथ एंजियोप्लास्टी, स्टेंट, बाईपास सर्जरी, पेसमेकर, इम्प्लांटेबल उपकरण और उन्नत इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। लेकिन आधुनिक उपचार की उपलब्धता का अर्थ यह नहीं कि रोकथाम का महत्व कम हो गया है। उपचार के बाद भी जीवन शैली में बदलाव, दवाओं का नियमित सेवन, चिकित्सकीय निगरानी और पुनर्वास महत्वपूर्ण बने रहते हैं।
डिजिटल तकनीक और हृदय की निगरानी
स्मार्टवॉच और अन्य पहनने योग्य उपकरणों ने हृदय गति और शारीरिक गतिविधि की निगरानी को आसान बनाया है। कुछ उपकरण ECG जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं। टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियां दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सलाह की पहुंच बढ़ाने में उपयोगी हो सकती हैं। फिर भी डिजिटल उपकरण चिकित्सक का विकल्प नहीं हैं। किसी उपकरण में असामान्य रीडिंग आने पर उसका अर्थ व्यक्ति की पूरी चिकित्सकीय स्थिति के संदर्भ में समझना आवश्यक है। तकनीक का सही उपयोग जागरूकता और निगरानी को मजबूत कर सकता है, लेकिन निदान और उपचार के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी रहता है।
आयुर्वेद, योग और समग्र स्वास्थ्य दृष्टि
भारतीय परंपरा में भोजन, दिनचर्या, शारीरिक सक्रियता और मानसिक संतुलन को स्वास्थ्य से जोड़ा गया है। योग और ध्यान तनाव प्रबंधन तथा शारीरिक सक्रियता की स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक या हर्बल उत्पाद को केवल ‘प्राकृतिक’ होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं है। विशेष रूप से यदि व्यक्ति पहले से हृदय, रक्तचाप, मधुमेह या अन्य बीमारी की दवा ले रहा हो तो किसी भी पूरक उपचार या उत्पाद के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है। प्रमाण-आधारित आधुनिक उपचार को बिना सलाह के छोड़ना भी उचित नहीं है।
परिवार से शुरू हो सकती है हृदय की सुरक्षा
हृदय स्वास्थ्य का अभियान घर से शुरू हो सकता है। परिवार में भोजन की गुणवत्ता सुधारना, बच्चों को खेल के लिए प्रोत्साहित करना, बुजुर्गों की नियमित जांच कराना, घर को तंबाकू-मुक्त रखना और आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता की जानकारी रखना छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि परिवार में कम उम्र में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य संबंधित बीमारी का इतिहास रहा है तो चिकित्सक को इसकी जानकारी देना विशेष रूप से उपयोगी है। पारिवारिक इतिहास व्यक्ति के जोखिम आकलन का एक हिस्सा हो सकता है।
रोकथाम ही सबसे व्यापक रणनीति
हृदय रोगों की रोकथाम किसी एक उपाय से संभव नहीं है। इसके लिए कई स्तरों पर एक साथ काम करना आवश्यक है। व्यक्ति अपनी जीवन शैली सुधारे, परिवार स्वस्थ वातावरण बनाए, स्कूल और कार्यस्थल शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करें तथा स्वास्थ्य व्यवस्था समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराए। WHO के अनुसार व्यवहारिक और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने से हृदय-रक्त वाहिका रोगों की बड़ी संख्या को रोका जा सकता है। तंबाकू से दूरी, स्वस्थ भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और समय पर जोखिम कारकों की पहचान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भविष्य की चिकित्सा : व्यक्तिगत उपचार से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक
हृदय रोगों के क्षेत्र में शोध लगातार आगे बढ़ रहा है। व्यक्तिगत जोखिम आकलन, जीनोमिक्स, उन्नत इमेजिंग, पहनने योग्य उपकरण, दूरस्थ निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण भविष्य में निदान और उपचार को और अधिक व्यक्तिगत बना सकते हैं। विश्व हृदय महासंघ की 2026 की रिपोर्ट में जन्मजात हृदय रोग पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि हृदय स्वास्थ्य का दायरा केवल जीवन शैली से उत्पन्न रोगों तक सीमित नहीं है। भविष्य की चिकित्सा में तकनीक जितनी महत्वपूर्ण होगी, उतना ही जरूरी होगा कि उसकी पहुंच समाज के सभी वर्गों तक हो। आधुनिक उपचार तभी व्यापक स्वास्थ्य लाभ में बदल सकता है जब समय पर जांच, आवश्यक दवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सा जरूरतमंद लोगों तक उपलब्ध हों।
स्वस्थ आदतें ही हृदय की सबसे मजबूत सुरक्षा
विश्व हृदय दिवस केवल एक दिन हृदय के बारे में चर्चा करने का अवसर नहीं है। यह अपने दैनिक जीवन की उन आदतों पर विचार करने का अवसर है जो आने वाले वर्षों में हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हृदय रोगों का बड़ा हिस्सा जोखिम कारकों की समय पर पहचान और स्वस्थ जीवन शैली से रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। यही कारण है कि हृदय की सुरक्षा का अर्थ केवल बीमारी होने के बाद उपचार करना नहीं, बल्कि बीमारी से पहले स्वास्थ्य की रक्षा करना है। आज जब जीवन की गति तेज हो रही है और काम तथा मनोरंजन दोनों का बड़ा हिस्सा स्क्रीन से जुड़ गया है, तब शरीर को सक्रिय रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव का बेहतर प्रबंधन, तंबाकू से दूरी, रक्तचाप और रक्त शर्करा की निगरानी तथा समय पर चिकित्सकीय जांच हृदय की सुरक्षा की मजबूत आधारशिला हैं। हृदय स्वास्थ्य व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी जरूर है, लेकिन केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं। स्वस्थ भोजन की उपलब्धता, स्वच्छ हवा, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, शारीरिक गतिविधि के अवसर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और आपात चिकित्सा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए स्वस्थ हृदय के लिए व्यक्ति, परिवार, समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था सभी को मिलकर काम करना होगा। हृदय की धड़कन हमें हर क्षण यह याद दिलाती है कि जीवन निरंतर गति का नाम है। इस गति को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय आज से ही छोटे-छोटे बदलाव शुरू करना आवश्यक है। विश्व हृदय दिवस का वास्तविक संदेश यही है कि हृदय की देखभाल किसी एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली स्वस्थ आदतों की निरंतर यात्रा है। यह आलेख एम्स, नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष तथा वर्तमान में मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में हृदय एवं रक्त वाहिका विज्ञान एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख डॉ. विनय कुमार बहल से हुई विस्तृत बातचीत पर आधारित है। इसमें हृदय रोगों के क्षेत्र में उनके दीर्घ चिकित्सकीय अनुभव, विशेषज्ञता और शोध-अनुभव से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारियों को समाहित किया गया है।
