उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
एंजेल चकमा मर्डर के पांच महीने बाद भी मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर है। वहीं, दो नाबालिग जमानत पर छूट चुके हैं। पुलिस की चार्जशीट में नस्लीय टिप्पणी की बात शामिल नहीं है।देहरादून के बहुचर्चित एंजेल चकमा हत्याकांड के छह आरोपियों में से कोई भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) से ताल्लुक नहीं रखता है। देहरादून पुलिस ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के समक्ष अपनी रिपोर्ट में यह तथ्य दिया है। इसके अलावा चार्जशीट में पुलिस ने नस्लीय टिप्पणियों का भी कहीं उल्लेख नहीं किया है। इस मामले में चकमा स्टूडेंड यूनियन ने पुलिस के दावों पर सवाल खड़े किए। आरोप लगाया कि जांच गलत दिशा में भटक गई है। दो नाबालिग आरोपी जमानत पर बाहर हैं और मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर है।चार्जशीट में नस्लीय टिप्पणी नहीं
पुलिस ने हत्याकांड में नस्लीय टिप्पणी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एसपी देहात पंकज गैरोला ने बताया कि मामले की विवेचना में आरोपियों के सीधे तौर पर किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी करने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसी आधार पर पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
दो आरोपियों को जमानत, मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर
इससे पहले केस की जांच में पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों में एसटी समुदाय के भी शामिल हैं। एनसीएसटी में हुई सुनवाई में अरुणाचल प्रदेश चकमा स्टूडेंट्स यूनियन सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने पुलिस के शुरुआती दावों पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि गलत दावों से मामले की दिशा भटकी है। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने मामले में दो नाबालिग आरोपियों को किशोर न्याय बोर्ड से जमानत मिल जाने और मुख्य आरोपी के अब तक पुलिस की पकड़ से दूर होने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
