उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
बदरीनाथ धाम के चढ़ावा चोरी मामले में रिकार्ड से खजाने का मिलान एसआइटी के पसीने छुड़ा रहा है।
रिकार्ड से पता चला कि बीते 23 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से दो जुलाई तक 34 बार चढ़ावा व आभूषणों की गणना हुई।इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण को चढ़ावे के रूप में 36 करोड़ से अधिक की नकदी अर्पित की। दान में मिले आभूषणों व रत्नों की कीमत कितनी है, इसका मूल्यांकन किया जा रहा है।एसआइटी को बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) तीन महीने के दान-चढ़ावे के दस्तावेज उपलब्ध करा चुकी है।इनकी जांच में पता चला कि 21 जुलाई तक श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण को 37 करोड़ 56 हजार 691 की धनराशि भेंट की।इसमें आभूषण शामिल नहीं हैं। जबकि, दो जुलाई तक 34 दिन की गणना में 26 दानपात्रों से 36 करोड़ दो लाख 81 हजार 69 रुपये का चढ़ावा मिला।एसआइटी के पास अभी 13 दिन की सीसीटीवी फुटेज ही उपलब्ध है, जिसमें 22, 25 व 29 जून और दो जुलाई की गणना की रिकार्डिंग है।एसआइटी के अनुसार हर गणना में चढ़ावा राशि व आभूषण ठिकाने लगाने के प्रमाण मिले हैं। यदि बाकी 32 दिनों की फुटेज भी रिकवर हो जाती है तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।बीकेटीसी ने 32 दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित होने को दावा किया था, लेकिन अब तर्क दिया जा रहा कि तकनीकी कारणों से 32 दिन की फुटेज गायब हो गई।एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि एसआइटी इस फुटेज को रिकवर करने में दिन-रात एक किए हुए है।बताया कि दो जुलाई तक हुई 34 दिन की गणना में यही अधिकारी शामिल थे, जिन पर शक की सुई घूम रही है। खास बात यह कि हर बार की गणना में मुख्य आरोपित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की देखरेख में हुई, जो अभी जेल में है।
नौटियाल की रिमांड के लिए फिर अदालत गई एसआइटी
चढ़ावा चोरी मामले में मुख्य आरोपित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की रिमांड के लिए एसआइटी ने मंगलवार को जिला जल की अदालत में याचिका दाखिला की है।एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि सुनवाई के लिए अदालत ने गुरुवार की तिथि तय की है। बताया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपित से पूछताछ जरूरी है।इससे मामले में कई राज खुल सकते हैं। विदित हो कि एसआइटी पहले भी दो बार नौटियाल को रिमांड पर लेने के अदालत जा चुकी है। दोनों बार अदालत ने उसकी याचिका अस्वीकार कर दी थी।
