उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
जनपद रुद्रप्रयाग एवं चमोली की सीमा पर समुद्र तल से लगभग 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कार्तिक स्वामी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के सुगम प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था), उत्तराखण्ड द्वारा क्षेत्र का विस्तृत एवं गहन स्थलीय निरीक्षण किया गया। भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को समर्पित यह मंदिर, जिन्हें दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन के नाम से भी पूजा जाता है, दक्षिण भारतीय राज्यों सहित देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। यात्रा सीजन के दौरान बढ़ती भीड़ और क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क मोड पर है।
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक महोदय ने कनकचौरी से मंदिर तक के लगभग 3.5 किलोमीटर के कठिन पैदल ट्रैकिंग रूट की सुरक्षा व्यवस्थाओं को परखा। उन्होंने ट्रैकिंग रूट पर स्थित संवेदनशील स्थलों और मंदिर परिसर का भौतिक निरीक्षण कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की रूपरेखा तैयार की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में स्थापित पुलिस दूरसंचार विभाग के वायरलेस रिपीटर केंद्र का भी बारीकी से निरीक्षण किया। विषम भौगोलिक परिस्थितियों में संचार व्यवस्था को हर समय चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए वहां तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष निर्देश दिए गए। इस रिपीटर केंद्र के माध्यम से केदारनाथ धाम सहित राज्य के अन्य जनपदों के संचार केंद्रों के साथ रियल-टाइम तालमेल और समन्वय की कार्यप्रणाली की भी उन्होंने विस्तृत जानकारी ली।अपर पुलिस महानिदेशक महोदय ने मौके पर मौजूद पुलिस उपाधीक्षक रुद्रप्रयाग विकास पुण्डीर और निरीक्षक पुलिस दूरसंचार को निर्देश दिए कि वे नियमित अंतराल पर इस सुदूरवर्ती रिपीटर केंद्र और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्थाओं का स्वयं स्थलीय निरीक्षण करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सूचना तंत्र और सुरक्षा बल तत्काल रिस्पॉन्ड कर सकें। मंदिर परिसर पहुंचने पर कार्तिक स्वामी मंदिर समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने स्मृति चिह्न भेंट कर अपर पुलिस महानिदेशक महोदय का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों और मंदिर समिति से वार्ता कर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और स्थानीय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का फीडबैक भी लिया, ताकि भविष्य की सुरक्षा एवं प्रबंधन योजनाओं को और अधिक जन-अनुकूल तथा प्रभावी बनाया जा सके।
