उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
झारखंड के जंगलों में बड़ी मात्रा में मिलने वाला साल का पेड़, ग्रामीणों की आमदनी का भी जरिया है. इसके बीज की बाजार में अच्छी मांग रहती है और ग्रामीण पेड़ से बीज इकट्ठा करके इसे बेचते हैं और बढ़िया कमाई करते हैं. हालांकि इस काम में काफी मेहनत लगती हैझारखंड के घने जंगल सिर्फ हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मिलने वाली वन उपज के लिए भी पूरे देश में पहचान रखते हैं. इन्हीं में से एक है साल का पेड़, जो झारखंड के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर पाया जाता है. गर्मी के मौसम में इस पेड़ से निकलने वाला फल ग्रामीणों के लिए आमदनी का एक महत्वपूर्ण साधन बन जाता है. यह फल देखने में साधारण लगता है, लेकिन इसके अंदर मौजूद बीज की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक रहती है.इस काम में है बहुत मेहनत,ग्रामीणों के अनुसार, साल के फल को इकट्ठा करने की प्रक्रिया काफी मेहनत भरी होती है. सुबह सूर्योदय से पहले, लगभग 4 बजे ही लोग जंगल की ओर निकल जाते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि इस समय तक पेड़ों से पके हुए फल जमीन पर गिर चुके होते हैं और धूप तेज होने से पहले उन्हें आसानी से इकट्ठा किया जा सकता है. परिवार के कई सदस्य मिलकर जंगल में फैले फलों को चुनते हैं और एक जगह जमा करते हैं.
इतनी मिलती है कीमत
ग्रामीण संतोष मुर्मू बताते हैं कि फल इकट्ठा करने के बाद इसकी अगली प्रक्रिया शुरू होती है. सबसे पहले इन फलों को एक साथ जलाया जाता है, ताकि ऊपर की पंखुड़ी और बाहरी हिस्सा हट जाए. इसके बाद अंदर का गोल बीज अलग किया जाता है. बीज को साफ करके सुखाया जाता है और फिर बाजार तक पहुंचाया जाता है. स्थानीय बाजारों में इसकी कीमत लगभग 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है.
