उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय ने 19 मई, 2026 को पद्मश्री से सम्मानित तथा विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में बोर्ड की बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक में डॉ. ए.के. नेगी, अधिष्ठाता; डॉ. आर.एस. नेगी, ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष; प्रो. एम.एस. पंवार, भूगोल विभागाध्यक्ष; तथा अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।बोर्ड ने ICAR, नई दिल्ली की 6वीं डीन समिति की संस्तुतियों तथा NEP 2020 के अनुरूप बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि, वानिकी और उद्यानिकी कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया और उन्हें अनुमोदित किया। बोर्ड ने एम.एससी. (कृषि) एग्रोनॉमी तथा एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन एंड कम्युनिकेशन कार्यक्रमों के साथ-साथ ग्रामीण प्रौद्योगिकी में पीजी डिप्लोमा तथा एक-वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की। अनुमोदित स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026–27 से लागू किए जाएंगे, जबकि पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम 2027–28 से प्रारंभ होंगे। वानिकी एवं उद्यानिकी विभागों में कौशल विकास पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति दी गई।इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार सिंह ने पाठ्यक्रम संरचना में संलग्न संकाय सदस्यों के समर्पित कार्य की सराहना की और कार्यक्रमों की शैक्षणिक गुणवत्ता की प्रशंसा की। उन्होंने सुझाव दिया कि एम.एससी. पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से बीज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संदर्भ में BSMA तथा ICAR मानकों के साथऔर अधिक समन्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने संबद्ध महाविद्यालयों की प्रत्यायन-संबंधी चिंताओं के संबंध में भी महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।अपने दौरे के दौरान, डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों के साथ आत्मीयता से संवाद किया और उनके अनुशासन, सम्मानजनक व्यवहार तथा सशक्त शैक्षणिक जागरुकता पर गहरा संतोष व्यक्त किया। वे विशेष रूप से छात्र समुदाय की विविधता से प्रभावित हुए, जो विभिन्न पृष्ठभूमियों, प्रतिभाओं, दृष्टिकोणों और आकांक्षाओं का समृद्ध संगम प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि यही विविधता शिक्षण वातावरण को जीवंत बनाती है और संस्थान में एकता, पारस्परिक सम्मान तथा सहयोग की भावना को और मजबूत करती है।डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहन भरे शब्दों के साथ यह भी प्रेरित किया कि वे एकाग्र, जिज्ञासु और उत्कृष्टता के प्रति समर्पित बने रहे चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या व्यक्तित्व विकास का। उन्होंने उन्हें उपलब्ध अवसरों का पूर्ण लाभ उठाने और आत्मविश्वास तथा दृढ संकल्प के साथ अपने लक्ष्यों की ओर निरंतर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।शिक्षकों को संबोधित करते हुए, उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनके समर्पण, मार्गदर्शन और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उन्हें इसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ युवा मनों का पोषण करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया तथा इस बात पर बल दिया कि एक सशक्त, प्रबुद्ध और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।डॉ. अशोक कुमार सिंह देश के सर्वाधिक सम्मानित कृषि वैज्ञानिकों में से एक हैं तथा पादप आनुवंशिकी और धान प्रजनन के अग्रणी विशेषज्ञ हैं। कृषि विज्ञान, विशेषकर बासमती धान की किस्मों के विकास में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। लगभग तीन दशकों तक ICAR-IARI, नई दिल्ली से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने 25 उन्नत बासमती धान किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनकी खेती भारत में लगभग बीस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है।उनके वैज्ञानिक योगदानों ने न केवल किसानों को बेहतर उत्पादकता और दाने की गुणवत्ता के माध्यम से लाभान्वित किया है, बल्कि भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया है। उनके नेतृत्व में विकसित बासमती धान की किस्मों से प्रतिवर्ष लगभग ₹50,000 करोड की विदेशी मुद्रा आय होने का अनुमान है। ICAR-IARI के पूर्व निदेशक रह चुके डॉ. सिंह को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है, और उन्होंने 250 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। वे INSA, NASI तथा NAAS के फेलो हैं।विश्वविद्यालय डॉ. अशोक कुमार सिंह की मूल्यवान उपस्थिति, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता है। उनका यह भ्रमण और उनके विशेषज्ञ सुझाव कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध उन्मुखता तथा संस्थागत विकास को और अधिक सुदृढ करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।
