उत्तराखंड डेली न्यूज:ब्योरो
यह कार्यक्रम उत्तराखंड और असम के 50 छात्र नवोन्मेषकों की पहचान, वित्तीय सहयोग और स्टार्टअप विकास को गति देगा, ताकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित एआई-सक्षम स्वच्छ ऊर्जा और क्लीनटेक उद्यम विकसित किए जा सकें,26 जून 2026: यूपीईएस, भारत के अग्रणी बहुविषयक एवं भविष्य-केंद्रित विश्वविद्यालयों में से एक, ने आज आईआईटी गुवाहाटी की टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (आईआईटीजी टीआईडीएफ) तथा उसके इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म आईआईटी गुवाहाटी बायोनेस्ट के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी के तहत स्पार्क-एआई (SPARC-AI) नामक संयुक्त पहल शुरू की जाएगी, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, कृषि-प्रौद्योगिकी (एग्रीटेक) और क्लीनटेक के क्षेत्र में छात्र-नेतृत्व वाले नवाचारों को प्रोत्साहित करना है।स्पार्क-एआई, अर्थात सपोर्टिंग पायोनियर्स इन एआई-ड्रिवन अल्टरनेटिव रिन्यूएबल्स एंड क्लीनटेक फॉर सस्टेनेबल लाइवलीहुड्स एंड इम्पैक्ट, की परिकल्पना उत्तराखंड और असम के उच्च क्षमता वाले छात्र नवोन्मेषकों की पहचान, उन्हें सहयोग प्रदान करने और उनके नवाचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यूपीईएस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिस (AITO) और आईआईटी गुवाहाटी बायोनेस्ट मिलकर एक संरचित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेंगे, जो क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के समाधान के लिए एआई-सक्षम, टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधान तैयार करेगा।यह पहल यूपीईएस के ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ बनने के दृष्टिकोण तथा ‘एआई-फर्स्ट यूनिवर्सिटी’ में उसके परिवर्तन के अनुरूप है। साथ ही, यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना को भी आगे बढ़ाती है, जिसका उद्देश्य नवाचार-आधारित, समावेशी और सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।उत्तराखंड और असम अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के कारण स्वच्छ ऊर्जा और कृषि-प्रौद्योगिकी नवाचार के लिए अत्यंत उपयुक्त क्षेत्र हैं। यह 18 माह का कार्यक्रम चार चरणों में संचालित होगा, जिनमें क्षेत्रीय अध्ययन एवं शोध, नवाचार एवं प्रोटोटाइप विकास, उद्यम निर्माण तथा अनुवतीं वित्तपोषण एवं व्यावसायीकरण शामिल हैं। कार्यक्रम के पहले चरण में 50 छात्र नवोन्मेषकों की पहचान की जाएगी। इनमें से 20 प्रतिभागियों- दोनों संस्थानों से 10-10-को वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाएगा तथा 10 नवाचारों को इनक्यूबेशन और स्टार्टअप विकास के लिए चुना जाएगा। चयनित परियोजनाओं को प्रत्येक के लिए ₹2 लाख तक का किकस्टार्टर अनुदान भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने प्रूफ ऑफ-कॉन्सेप्ट को विकसित कर बाज़ार के लिए तैयार कर सकें।इस साझेदारी पर बोलते हुए, यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय ने कहा, “यूपीईएस में हमारा मानना है कि भविष्य के सबसे प्रभावशाली नवाचार बोर्डरूम से नहीं, बल्कि उन छात्रों से आएंगे जो अपने समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं को गहराई से समझते हैं। स्पार्क-एआई भारत की पहली एआई-फर्स्ट यूनिवर्सिटी के रूप में हमारी पहचान का स्वाभाविक विस्तार है। यह पहलछात्रों को स्वच्छ ऊर्जा, कृषि और सतत आजीविका से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने का अवसर प्रदान करेगी। आईआईटी गुवाहाटी के साथ यह साझेदारी दो सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों को जोड़ते हुए क्षेत्रीय आवश्यकताओं, उन्नत प्रौद्योगिकी और छात्र उद्यमिता के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करती है। हमें विश्वास है कि इससे ऐसे उद्यम विकसित होंगे जो उन क्षेत्रों की तरह ही सशक्त और टिकाऊ होंगे जिनसे वे प्रेरणा लेते हैं।”आईआईटी गुवाहाटी बायोनेस्ट की ओर से एक प्रवक्ता ने कहा, “स्पार्क-एआई को इस प्रकार तैयार किया गया है कि युवा नवोन्मेषक समस्या की पहचान से लेकर प्रोटोटाइप विकास और उद्यम निर्माण तक की पूरी यात्रा तय कर सकें। क्षेत्रीय अनुभव, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहयोग और वित्तीय सहायता को एक साथ जोड़कर यह कार्यक्रम छात्रों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा जो न केवल तकनीकी रूप से सशक्त हों, बल्कि समुदायों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप भी हों। हमें यूपीईएस के एआईटीओ के साथ इस पहल में साझेदारी करते हुए प्रसन्नता है, जो उत्तराखंड की पर्वतीय घाटियों और असम की वादियों को नवाचार के माध्यम से जोड़ती है।”कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को समस्या की पहचान, डिज़ाइन थिंकिंग, एआई एकीकरण, प्रौद्योगिकी विकास, बौद्धिक संपदा रणनीति, उद्यमिता, व्यवसाय योजना और निवेशकों के समक्ष प्रस्तुति जैसे विषयों पर निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। आईआईटी गुवाहाटी में आयोजित एक आवासीय बूटकैंप के माध्यम से प्रतिभागियों को न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) विकास, उद्यम निर्माण, टीम गठन, वित्तपोषण और व्यावसायीकरण पर भी प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन डेमो डे के साथ होगा, जहाँ प्रतिभागी निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत करेंगे।यह साझेदारी यूपीईएस के एआई-फर्स्ट विश्वविद्यालय के रूप में व्यापक परिवर्तन को भी प्रतिबिंबित करती है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिस (AITO) शिक्षण, अधिगम, शोध, नवाचार, उद्यमिता और समग्र छात्र अनुभव में एआई एकीकरण को आगे बढ़ाने वाला केंद्रीय तंत्र बन चुका है।हाल के वर्षों में यूपीईएस ने ओपनएआई, गूगल क्लाउड, सेल्सफोर्स और हार्वर्ड बिज़नेस इम्पैक्ट जैसे वैश्विक संगठनों के साथ भी साझेदारियाँ की हैं, जिनके माध्यम से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षण ढाँचों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनाया गया है। इन सभी सहयोगों का उद्देश्य छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए आज ही वास्तविक तकनीकी अनुभव प्रदान करना है।स्पार्क-एआई के माध्यम से यूपीईएस और आईआईटी गुवाहाटी बायोनेस्ट ऐसे नवोन्मेषकों की नई पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं, जो अपनी क्षेत्रीय जड़ों से जुड़े हों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सशक्त हों और एक सशक्त, आत्मनिर्भर तथा सतत भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हों।
अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें: www.upes.ac.in
