उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
नारायणपुर के डूमरतराई गांव में जब कुबेर देहारी की बारात बैलगाड़ी पर सड़कों से गुजरी, तो राह चलते लोग ठहरकर उसे देखने लगे. यह कदम किसी मजबूरी का नतीजा नहीं था, बल्कि एक खास सोच और सामाजिक संदेश को सामने रखने की पहल थी. देखें ये वायरल वीडियो..छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से सामने आई एक शादी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. जिसने आधुनिक दिखावे की परंपरा को चुनौती देते हुए सादगी और संस्कृति की नई मिसाल पेश की है. जिला पुलिस बल में कार्यरत जवान कुबेर देहारी ने अपनी शादी को केवल एक निजी समारोह तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बना दिया है.बैलगाड़ी पर निकाली बारात,आज जहां शादियों में महंगी गाड़ियां, भव्य सजावट और करोड़ों का खर्च आम बात बन चुकी है, वहीं कुबेर ने इस ट्रेंड से बिल्कुल अलग रास्ता चुना है. उन्होंने अपनी बारात बैलगाड़ी पर निकाली, जिसे देखकर गांव के लोग हैरान रह गए. यह कोई मजबूरी नहीं थी, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला था. उनका मानना है कि पारंपरिक तरीकों को अपनाकर हम न सिर्फ अपनी संस्कृति को बचा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदारी निभा सकते हैं.पूरा विवाह समारोह था इको-फ्रेंडली,इस अनोखी शादी की खासियत सिर्फ बैलगाड़ी तक ही सीमित नहीं रही. पूरा विवाह समारोह इको-फ्रेंडली तरीके से आयोजित किया गया था. मंडप को नारियल, सल्फी, छिंद और जामुन के पत्तों से सजाया गया, जो स्थानीय परंपराओं की झलक दिखाता है. इसके अलावा साज-सज्जा में मिट्टी के बर्तन, सूपा और टोकनी जैसे पारंपरिक सामानों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कृत्रिम और आधुनिक सजावट की जरूरत ही नहीं पड़ी. इस शादी में बस्तर क्षेत्र की हल्बा जनजाति की संस्कृति को भी खूबसूरती से शामिल किया गया.कुबेर देहारी का मानना है कि अगर आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी सादगी अपनाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि शादी को दिखावे का माध्यम नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. उनके अनुसार, शादी खुशियों का अवसर है, न कि आर्थिक बोझ है.इस शादी की चर्चा अब सिर्फ नारायणपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में लोग इसकी सराहना कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है. कई यूजर्स ने इसे असली रॉयल वेडिंग बताया है, जहां दिखावे के बजाय संस्कार और सादगी नजर आती है. कुछ लोगों ने लिखा कि इस तरह की पहल समाज को नई दिशा देने का काम करती है.
