
उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्यूरो
500 से अधिक प्रतिभागी, 9 अंतरराष्ट्रीय और 18 राष्ट्रीय वक्ता इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च, हेल्थकेयर इनोवेशन और वैश्विक साझेदारियों को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आए
देहरादून, 7 अक्टूबर 2026: यूपीईएस ने आज देहरादून स्थित अपने बिधौली कैंपस में वर्ल्ड कांग्रेस ऑन हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी 2026 का उद्घाटन किया। इस आयोजन में भारत और दुनिया भर से प्रमुख शोधकर्ता, क्लिनिशियंस, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, पॉलिसीमेकर्स, इनोवेटर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल हुए, ताकि हेल्थ रिसर्च और टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जा सके।स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी यानी एसओएचएसटी, यूपीईएस द्वारा आयोजित यह तीन-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस डॉ. पद्मा वेंकट, डीन, एसओएचएसटी, यूपीईएस और डॉ. निधि चौहान, प्रोफेसर और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी, एसओएचएसटी, के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। यह कांग्रेस 7 से 9 अक्टूबर 2026 तक ‘ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थ थ्रू रिसर्च एंड इनोवेशन’ थीम के तहत आयोजित हो रही है। इसमें भारत और विदेश से 500 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें 9 प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वक्ता और 18 प्रमुख राष्ट्रीय वक्ता वैज्ञानिक आदान-प्रदान, सहयोगी रिसर्च और उभरती हेल्थकेयर चुनौतियों पर चर्चाओं में योगदान देंगे।कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक उद्घाटन समारोह और गेस्ट्स ऑफ ऑनर के संबोधनों के साथ हुई। समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि पद्म श्री प्रोफेसर बलराम भार्गव, पूर्व डायरेक्टर जनरल, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर, और पूर्व सचिव, डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च, भारत सरकार, के संबोधन से हुई। इस अवसर पर डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस भी उपस्थित रहे। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन, ने वर्चुअली प्रेसिडेंशियल एड्रेस दिया।इस प्रतिष्ठित सभा में पद्म भूषण प्रोफेसर निर्मल कुमार गांगुली, पूर्व डायरेक्टर जनरल, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च; प्रोफेसर भूषण पटवर्धन, नेशनल रिसर्च प्रोफेसर, मंत्रालय आयुष, भारत सरकार; पद्म श्री प्रोफेसर एन. पुन्नियामूर्ति, एथ्नोवेटरिनरी हर्बल मेडिसिन कंसल्टेंट, ट्रांसडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु; डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, आईएएस, सचिव, उत्तराखंड सरकार; और डॉ. दुर्गेश पंत, डायरेक्टर जनरल, उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यानी यूकॉस्ट, भी शामिल रहे। व्यापक कांग्रेस में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिनमें पर्फ्यू यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के प्रोफेसर सुरेश मित्तल; टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख, जर्मनी के प्रोफेसर कैन डिन्सर, और फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के डॉ. अजीत कुमार कौशिक शामिल हैं।
सभा को संबोधित करते हुए, पद्म श्री प्रोफेसर बलराम भार्गव, पूर्व डीजी, आईसीएमआर, ने कहा, “वर्ल्ड कांग्रेस ऑन हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी हेल्थकेयर में रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। भारत को नई दवाओं, बायोसिमिलर्स और इनोवेटिव फार्मा में अधिक निवेश करना होगा, और मेरा मानना है कि यह संस्थान और इसके छात्र इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इतने शानदार कैंपस और सक्षम वातावरण के साथ, मुझे पूरा विश्वास है कि वे ऐसा कर पाएंगे।”डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस, ने कहा, “यूपीईएस में, हम साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, बायोमार्कर्स, एआई और जीनोमिक्स का उपयोग करते हुए टर्मिनल बीमारियों की शुरुआती पहचान के लिए हेल्थ साइंसेज़ में रिसर्च और इनोवेशन पर फोकस कर रहे हैं। साथ ही, कम लागत वाले मेडिकल डायग्नॉस्टिक उपकरणों को बनाने की संभावना पर भी काम कर रहे हैं, ताकि हेल्थकेयर को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जा सके। हमारा मानना है कि डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 जैसा वैश्विक प्लेटफॉर्म हमें वैज्ञानिक रिसर्च को टेक्नोलॉजी, क्लिनिकल एक्सपर्टीज़, इंडस्ट्री और पॉलिसी से जोड़कर इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। हमें उम्मीद है कि यह सार्थक अंतरराष्ट्रीय सहयोगों को सक्षम करेगा, जो आशाजनक विचारों को अकादमिक चर्चा से आगे बढ़ाकर ऐसे समाधानों में बदलेंगे, जो लोगों और कम्युनिटीज़ के लिए वास्तविक प्रभाव पैदा कर सकें।”यह कांग्रेस बायोटेक्नोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, जीनोमिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ, पब्लिक हेल्थ, रीजनरेटिव मेडिसिन और ट्रांसलेशनल मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में फैले वैज्ञानिक कार्यक्रम के माध्यम से इस मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को दर्शाती है। कीनोट लेक्चर्स, पैनल डिस्कशन्स, रिसर्च प्रेजेंटेशन्स, पोस्टर सेशन्स और इंडस्ट्री इंटरेक्शन्स को अलग-अलग डिसिप्लिन्स में,सहयोग को प्रोत्साहित करने और वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक हेल्थकेयर समाधानों में बदलने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए डिजाइन किया गया है।अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत भागीदारी इस सहयोगी इकोसिस्टम को और मजबूत करती है। डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 में शामिल विशेषज्ञ पर्च्यू यूनिवर्सिटी, टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख, फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गांधीनगर, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी जैसे संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आईबीएम इंडिया, जुबिलेंट बायोसिस, क्यूराटेक बायोलॉजिक्स और ऑपेरॉन टेक्नोलॉजीज़ से जुड़े विशेषज्ञ भी इस कांग्रेस का हिस्सा हैं, जिससे एकेडेमिया, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री के बीच अधिक संवाद संभव हो रहा है।उद्घाटन दिवस में ‘नरिश टू फ्लरिश (द वेलनेस ब्लूप्रिंटः शेपिंग अ हेल्दियर फ्यूचर)’ विषय पर एक पैनल डिस्कशन हुआ, जिसे डॉ. निधि कुमार, सेलिब्रिटी लीड एंकर, डीडी, एआई, ने मॉडरेट किया। इस चर्चा में डॉ. जयंती सिंह, एपिडेमियोलॉजिस्ट और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट; श्री जी.सी. कांडवाल, डिप्टी कमिश्नर, एफडीए, उत्तराखंड, श्री सुखविंदर सिंह, एचओडी, एफएसएसएआई, यूटी एडमिनिस्ट्रेशन, चंडीगढ़, सुश्री रजत शक्ति, स्टेशन हेड, रेड एफएम 93.5; सुश्री रूपा सोनी, न्यूट्रिशनिस्ट; और सुश्री आशु जैन, पीएचडी, आईआईटी-डी, हाइब्रिड एथलीट और हेल्थ इन्फ्लुएंसर, शामिल हुए। सेशन का फोकस वेलनेस, न्यूट्रिशन, फूड रेगुलेशन और प्रिवेंटिव हेल्थ पर रहा।दोपहर के कार्यक्रम में पारंपरिक ज्ञान, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, लाइफस्टाइल मेडिसिन और वेलबीइंग के लिए एविडेंस-बेस्ड अप्रोचेज़ पर विचार रखे गए। ‘वेदा टू विलेजः साइंस, पॉलिसी एंड प्रैक्टिस फॉर होलिस्टिक वेलबीइंग’ सेशन की शुरुआत प्रो. डॉ. जी. जी. गंगाधरन, आयुर्वेदाचार्य और चीफ फिजिशियन, आयुर्वेदामृतम हेल्थ सेंटर, बेंगलुरु, के कीनोट से हुई। उनका विषय था ‘मंथ-वाइज केयर ऑफ एक्सपेक्टेंट मदर-द आयुर्वेद वे’। इसके बाद प्रो. एन. पुन्नियामूर्ति, एथ्नोवेटरिनरी हर्बल मेडिसिन कंसल्टेंट टू एनडीडीबी और तनुवास, तंजौर, ने ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च ऑन एथ्नो-वेटरिनरी मेडिसिन फॉर वन हेल्थः मॉलिक्यूलर फार्माकोलॉजी टू इकोसिस्टम रेज़िलिएस’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें पारंपरिक ज्ञान, मॉलिक्यूलर रिसर्च और व्यापक वन हेल्थ दृष्टिकोण के संगम को एक्सप्लोर किया गया। डॉ. भावना प्रशर, सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर-आईजीआईबी, मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, दिल्ली, ने ‘आयुरजीनोमिक्सः इंटीग्रेटिंग ट्रेडिशनल नॉलेज एंड मॉडर्न जीनोमिक्स फॉर प्रिसिजन हेल्थकेयर’ विषय पर अपने सेशन के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के मिलन को आगे समझाया।’रिलेवेंस ऑफ आयुर्वेद इन टुडे’स लाइफ’ विषय पर एक और पैनल को वैद्य शिखा प्रकाश, पड़ाव – स्पेशलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर, देहरादून, ने मॉडरेट किया। इसमें प्रो. डॉ. जी. जी. गंगाधरन; डॉ. राजीव कुरेले, उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी; डॉ. भावना प्रशर, सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर-आईजीआईबी, मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी; और सुश्री सुरभि पांडे, द हंस फाउंडेशन, पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। चर्चा में आयुर्वेद की समकालीन प्रासंगिकता और स्वास्थ्य व वेलबीइंग के बदलते दृष्टिकोणों में इसकी भूमिका पर विचार किया गया।पहले दिन का समापन फ्रॉम हॉस्पिटल्स टू हेल्दी कम्युनिटीज़ः हू इज़ रिस्पॉन्सिबल फॉर प्रिवेंशन?’ विषय पर चर्चा के साथ हुआ। इसे डॉ. राय गांगुली, एसओएलएसएच, ने मॉडरेट किया। पैनल में डॉ. एलेक्स थॉमस, लाइफस्टाइल मेडिसिन फिजिशियन; प्रो. पद्मा वेंकट, डॉ. प्रांजलि, साइकोलॉजी एक्सपर्ट, और डॉ. मोनिका पठानिया, लाइफस्टाइल मेडिसिन, इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड होलिस्टिक वेलनेस एक्सपर्ट, शामिल रहे। चर्चा ने लाइफस्टाइल मेडिसिन, पब्लिक हेल्थ, साइकोलॉजी और इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर से जुड़े दृष्टिकोणों को एक साथ लाया, ताकि इलाज से रोकथाम की ओर फोकस शिफ्ट करने में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स की भूमिका पर विचार किया जा सके।कांग्रेस के साथ पांच विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स भी आयोजित की गईं, जिनमें हेल्थकेयर एंटरप्रेन्योरशिप और स्पेस टेक फॉर हेल्थ से लेकर एडवांस्ड माइक्रोस्कोपी, नेक्स्ट जेनरेशन पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नॉस्टिक्स और ह्यूमन माइक्रोबायोम रिसर्च के लिए टेक्नोलॉजीज़ जैसे क्षेत्र शामिल थे। एक साइंटिफिक एंड टेक्नोलॉजी एग्ज़िबिशन भी अकादमिक संस्थानों, रिसर्च संगठनों, स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री पार्टनर्स से जुड़े रिसर्च प्रोटोटाइप्स, डायग्नॉस्टिक टेक्नोलॉजीज़, लैबोरेटरी सॉल्यूशन्स और हेल्थकेयर इनोवेशन्स को प्रदर्शित कर रही है।डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 8 और 9 अक्टूबर को आगे जारी रहेगा, जिसमें और कीनोट एड्रेसेज़, साइंटिफिक प्रेजेंटेशन्स, पैनल डिस्कशन्स, इंडस्ट्री इंटरेक्शन्स और सिनेप्स स्टूडेंट इनोवेशन फोरम शामिल होंगे। इससे ग्लोबल हेल्थ साइंसेज़ इकोसिस्टम में रिसर्च पार्टनरशिप्स और सहयोग के अवसर और मजबूत होंगे।

