
उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना से मिला संबल, सालाना 8 से 10 लाख रुपये का लाभ; 10 से 12 लोगों को दे रहे रोजगार
पहाड़ों से पलायन की खबरों के बीच कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो अपने गांव लौटकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। अगस्त्यमुनि विकासखंड के पाटा गांव निवासी सोहन सिंह बिष्ट ने रिवर्स पलायन कर रुद्रप्रयाग में बेकरी व्यवसाय स्थापित किया है। पंजाब में नौकरी करने के बाद अपने गृह जनपद लौटे सोहन आज न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने उद्यम के माध्यम से 10 से 12 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।सोहन सिंह बिष्ट की बेकरी इकाई में बन, बिस्कुट, पेटीज, केक, ब्रेड और नमकीन सहित कई प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की मांग रुद्रप्रयाग के साथ अन्य जनपदों में भी है। स्थानीय स्तर पर कारोबार स्थापित कर उन्होंने स्वरोजगार की संभावनाओं को साकार किया है और क्षेत्र के अन्य युवाओं के सामने भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
प्रशिक्षण से मिली राह, सरकारी योजना ने दिया सहारा
बेकरी व्यवसाय शुरू करने से पहले सोहन सिंह ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से बेकरी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने उत्पाद निर्माण के साथ व्यवसाय से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी हासिल की। इसके बाद प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण लेकर अपनी बेकरी इकाई स्थापित की।योजना के अंतर्गत उन्हें 8.50 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ प्राप्त हुआ। सरकारी सहायता, प्रशिक्षण और स्वयं की मेहनत के सहारे उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे इसे एक सफल उद्यम का रूप दिया।
सालाना 8 से 10 लाख रुपये का लाभ
आज सोहन सिंह बिष्ट अपने बेकरी व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 8 से 10 लाख रुपये का लाभ अर्जित कर रहे हैं। उनकी इकाई में 10 से 12 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका को सहारा मिलने के साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।पंजाब में नौकरी करने से लेकर अपने गृह जनपद में सफल उद्यम स्थापित करने तक का उनका सफर बताता है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ और निरंतर मेहनत से पहाड़ों में भी रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।सोहन सिंह बिष्ट की यह पहल रिवर्स पलायन की सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। उनका उद्यम स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं का उपयोग कर अपने क्षेत्र में ही रोजगार सृजन करने तथा आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रहा है।

