
उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
नारायणबगड़ में नारेबाजी कर सदन से बाहर निकले प्रधान, मांगें पूरी नहीं होने पर विधानसभा चुनाव के बहिष्कार और उग्र आंदोलन की चेतावनी
नारायणबगड़। विकासखंड नारायणबगड़ में शुक्रवार को आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक में ग्राम प्रधानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हंगामा किया। लंबे समय से मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्राम प्रधानों ने प्रधान संघ अध्यक्ष योगेंद्र सिंह खत्री के नेतृत्व में बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रधान नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने के साथ ही आंदोलन तेज किया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच मांगों को लेकर तीखी बहस भी हुई। ब्लॉक प्रमुख गणेश चन्दोला ने कई बार प्रधानों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन प्रधान अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि लंबे समय से शासन-प्रशासन के समक्ष समस्याएं उठाई जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मानदेय बढ़ाने से लेकर वित्तीय अधिकार देने की मांग
ग्राम प्रधानों ने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी उठाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, वित्तीय अधिकार और संसाधन नहीं मिल रहे हैं। ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने प्रधानों का मासिक मानदेय 20 हजार रुपये करने, ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में शामिल होने वाले वार्ड सदस्यों को मानदेय देने और मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता समाप्त कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।प्रधानों ने अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने की मांग भी की। इसके अलावा राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने तथा बजट का आवंटन जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर करने की बात कही।
ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने पर जोर
ग्राम प्रधानों ने विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि गठित करने तथा 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने की मांग की। उन्होंने पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत 29 विभागों के अधिकार और कार्य ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने पर भी जोर दिया।इसके साथ ही जिला योजना के निर्माण में ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधान संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करने, ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कराने और पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्राम प्रधानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होने तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आगामी विधानसभा चुनाव में बहिष्कार किया जाएगा और क्षेत्र में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में हुए घटनाक्रम के बाद ग्राम पंचायतों की मांगों और उनके समाधान को लेकर शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान सुरेंद्र लाल प्रधान किमोली, भगवती प्रसाद सती (जिला सचिव एवं प्रधान सीरी), बीना नेगी (प्रधान पंती), दलवीर आर्या (सचिव), मंजू देवी, मीना देवी, विपिन मनोड़ी, दिगपाल राम, जयवीर सिंह, भरत नेगी, उर्मिला कंडारी और देवेंद्र कोहली सहित अन्य ग्राम प्रधान मौजूद रहे।

