उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
देहरादून (दीपक पंवार), लोक कलाकार संरक्षण संघ की ओर से दून के उत्तरांचल प्रेस क्लब में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसमें लोक कलाकारों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों और पिछले 2 वर्षों से रुके हुए भुगतान को लेकर आवाज़ उठाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं, तो वे 10 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे।गौरतलब हो कि उत्तराखंड़ के लोक कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की लोक संस्कृति के संवर्धन में जुटे सांस्कृतिक दलों के कलाकारों के हित में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए यात्रा के दौरान मार्ग दुर्घटना की स्थिति में दुर्घटना बीमा किए जाने की घोषणा की है। साथ ही सांस्कृतिक विभाग के सांस्कृतिक दलों का कार्यक्रम आवंटन एवं भुगतान सांस्कृतिक निदेशालय के माध्यम से किए जाने के निर्देश दिए हैं।दरअसल, 2 जून 2025 को उत्तराखंड के विभिन्न लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने अपनी मांगों को लेकर संस्कृति मंत्री के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया था। धरने का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मुख्यमंत्री पोर्टल पर निर्देश जारी किए गए थे कि कलाकारों को पूर्व की भांति कार्यक्रम आवंटन, बिल भुगतान, मानदेय में वृद्धि, कलाकार पेंशन, कलाकार कल्याण कोष से सहायता तथा जिला स्तर पर कार्यक्रम आवंटन में रोस्टर प्रणाली की बाध्यता समाप्त करने सहित अन्य व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जाएं।स्थानीय प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए,कलाकारों का कहना है कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण घोषणाओं और निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर पूर्व की व्यवस्था के अनुरूप कार्यक्रम आवंटन और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे लोक कलाकारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।सांस्कृतिक दलों ने सरकार के समक्ष करीब दस प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कार्यक्रम आवंटन व्यवस्था में सुधार, जीएसटी की बाध्यता समाप्त करना, बार-बार ऑडिशन की व्यवस्था पर रोक, मानदेय एवं यात्रा भत्ता बढ़ाना, संस्कृति संरक्षण के लिए प्रभावी नीति, सरकारी आयोजनों में 80 प्रतिशत स्थानीय सांस्कृतिक दलों की भागीदारी, पर्यटन स्थलों पर नियमित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कलाकारों को पहचान पत्र जारी करना, संस्कृति निदेशालय को नोडल विभाग बनाए रखना तथा वरिष्ठ कलाकारों के लिए सम्मान समारोह आयोजित करना शामिल है।कलाकारों का कहना है कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और लोक कला को देश-दुनिया में पहचान दिलाने में सांस्कृतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जी-20 जैसे बड़े आयोजनों से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी अतिथियों के स्वागत तक विभिन्न अवसरों पर प्रदेश के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। पिथौरागढ़ में आयोजित छोलिया नृत्य की सामूहिक प्रस्तुति ने भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सांस्कृतिक कर्मी प्रदेश की पारंपरिक लोक संस्कृति, लोक संगीत और लोक कला को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार सांस्कृतिक दलों से जुड़े कलाकारों के हित में लगातार कार्य कर रही है और आगे भी उनके हितों के लिए प्रयास जारी रहेंगे।मुख्यमंत्री के नए निर्देशों से लोक कलाकारों को कार्यक्रम आवंटन और भुगतान की व्यवस्था में राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं दुर्घटना बीमा की घोषणा को कलाकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।इस प्रेस वार्ता के दौरान संघ के अध्यक्ष जितेंद्र बलोनी, महासचिव बच्चन सिंह राणा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र राणा, कुंदन सिंह चौहान और गिरीश पहाड़ी आदि मौजूद रहे।
