
उत्तराखंड डेली न्यूज:ब्योरो
घर के पास बकरियों के झुंड पर किया हमला, ग्रामीणों ने वन विभाग से की गश्त बढ़ाने और मुआवजे की मांग
यमकेश्वर। विकासखंड यमकेश्वर के डांडा मंडल अंतर्गत ग्राम सभा धारकोट में गुलदार के हमले से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बुधवार दोपहर घर के पास बंधी बकरियों के झुंड पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया। इस घटना में चार बकरियों की मौत हो गई। दिनदहाड़े हुई इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और प्रभावित पशुपालक को उचित मुआवजा देने की मांग की है।जानकारी के अनुसार, धारकोट निवासी शिवप्रकाश उनियाल के घर के समीप उनकी बकरियां बंधी हुई थीं। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे गुलदार अचानक वहां पहुंचा और बकरियों के झुंड पर हमला कर दिया। हमले में तीन बकरों और एक बकरी की मौत हो गई। अचानक हुए इस हमले से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
आबादी के नजदीक गुलदार की सक्रियता से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता से लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है। आबादी के नजदीक दिनदहाड़े गुलदार के पहुंचने से ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि वन्यजीवों की आवाजाही इसी तरह आबादी वाले क्षेत्रों में बनी रही तो पशुधन के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहेगा। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और मवेशियों को लेकर जंगल एवं आसपास के रास्तों पर आने-जाने वाले ग्रामीणों में भय का माहौल है।
वन विभाग की टीम मौके पर भेजी
वन क्षेत्राधिकारी अनुराग जोशी ने बताया कि धारकोट गांव में गुलदार के हमले की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम को मौके पर भेज दिया गया है। टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित पशुपालक को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा।
गश्त बढ़ाने और शीघ्र मुआवजे की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।ग्रामीणों ने प्रभावित पशुपालक को हुए नुकसान का आकलन कर नियमानुसार जल्द मुआवजा देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पहाड़ी गांवों में पशुपालन आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में पशुधन के नुकसान से परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

