उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
हिंदी भाषा को संस्कृति, पहचान और राष्ट्रीय चेतना की संवाहक बताया।
डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में सोमवार को राष्ट्रीय हिंदी दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भाषण और कविता पाठ के माध्यम से हिंदी भाषा की महत्ता और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। समारोह के दौरान विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई।कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवींद्र सिंह नेगी ने हिंदी दिवस की शुभकामनाओं के साथ किया। उन्होंने कहा कि भाषा महज संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि किसी राष्ट्र की संस्कृति, पहचान, चेतना और अस्मिता की संवाहक होती है। हिंदी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की जीवंत चेतना का सशक्त माध्यम है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. सी.एम. जनस्वाण ने हिंदी के व्यापक प्रभाव, उपयोगिता और वर्तमान संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को व्यवहार, चिंतन और अभिव्यक्ति का सहज माध्यम बनाने का आह्वान किया। डॉ. जोशी, डॉ. पंत और डॉ. द्विवेदी ने भी हिंदी भाषा की महत्ता पर विचार व्यक्त किए और कविताओं व साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी की समृद्धि को रेखांकित किया।
विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
आशुतोष मैखुरी, तान्या, मनीष, नरेंद्र कुमार सहित कई विद्यार्थियों ने भाषण और कविता पाठ प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने हिंदी के प्रचार-प्रसार, सम्मान और उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
नशे से दूर रहने का दिया संदेश
समारोह में नशामुक्ति को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नशा व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार जीवन जीने का आह्वान किया गया। इस दौरान डॉ. पंत ने सभी छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाई।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने हिंदी भाषा और हिंदी विषय की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति और परंपरा को सहेजने तथा भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।अंत में प्राचार्य ने सभी प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। हिंदी के सम्मान और नशामुक्त समाज के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
