उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर पर मंगलवार रात अधिक वर्षा के कारण गड्ढे होने और मिट्टी धंसने का वीडियो प्रसारित होने के बाद सरकार और केंद्रीय परिवहन विभाग ने संज्ञान ले लिया, जिसके बाद एनएचएआई ने भी कार्रवाई कर दी।प्राधिकरण ने टीम का नेतृत्व कर रहे टीम लीडर, ठेकेदार और प्रोजेक्ट मैनेजर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर परियोजना से हटा दिया। इसके साथ ही इकोनामिक कॉरिडोर के पर्यवेक्षण और रखरखाव का जिम्मा संभाल रही प्राधिकरण अभियंता फर्म मेसर्स चैतन्य प्रोजेक्ट्स कंसल्टेंसी लिमिटेड (जेवी इसान) और निर्माण करने वाली ईपीसी ठेकेदार कंपनी मेसर्स कृष्णा कांस्टेलेशन प्राइवेट लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, सहायक राजमार्ग अभियंता स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार कॉरिडोर का उद्घाटन किया था। मंगलवार रात पहली तेज वर्षा से दिल्ली से देहरादून की ओर जाते हुए (मुजफ्फरनगर क्षेत्र के गांव खेड़ा मस्तान के ऊपर फ्लाईओवर के पास) मुख्य सड़क बीचों-बीच से धंस गई थी, और दो गड्ढे बन गए थे।गुरुवार सुबह वाहन चालकों को इसका अंदाजा नहीं हो पाया, जिससे एक बस और तीन कार क्षतिग्रस्त हो गई थी। यात्री ने धंसे एक्सप्रेस-वे का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया था। इसके बाद एनएचएआइ कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर गड्ढे भरवाए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। एनएचएआई की बागपत इकाई (पीआईयू) की जांच में सामने आया है कि यह हादसा अपर्याप्त संघनन (कंपैक्शन), ढाल संरक्षण में कमी और दोषपूर्ण जल-निकासी जैसे गंभीर निर्माण दोषों के कारण हुआ।
फर्म के सभी लंबित और भावी भुगतानों व इनवाइस पर रोक लगा दी गई
इसे पर्यवेक्षण और गुणवत्ता निगरानी की विफलता माना गया। इस लापरवाही पर प्राधिकरण मुख्यालय ने संबंधित खंड के पूर्व सहायक राजमार्ग अभियंता आलोक कुमार (जो पहले ही हटाए जा चुके थे) को भविष्य के लिए एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सभी परियोजनाओं से स्थायी रूप से प्रतिबंधित (डिबार) कर दिया है।उनके सर्विस रिकॉर्ड में भी प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी। प्राधिकरण अभियंता फर्म के टीम लीडर कुलदीप कुमार राजदान व अन्य कर्मियों को प्रतिबंधित करने तथा वाच-लिस्ट में डालने के लिए मामला उच्च अधिकारी को भेज दिया गया है। इसके अलावा फर्म के समस्त लंबित व भावी भुगतानों व इनवाइस पर रोक लगा दी गई है।ईपीसी ठेकेदार कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेंद्र पाल सिंह को हटाने के साथ ही ठेकेदार कंपनी को नान-परफार्मर घोषित करने, भारी जुर्माना लगाने और प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी गई है। दोनों फर्मों को नीति परिपत्र और अनुबंध के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों में जवाब मांगा गया है।उन्हें संपूर्ण पैकेज-दो खंड का चैनेज-वार निरीक्षण कर सात दिनों में अपनी लागत पर सभी कटान और निर्माण दोष ठीक करने का आदेश दिया गया है। फिलहाल गड्ढे भरकर यातायात सुचारू कर दिया गया है, लेकिन जल निकासी की पक्की नाली ठीक न होने के कारण वैकल्पिक तौर पर अस्थाई नाली बनाई गई है।
