उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के खुलने से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ-रुड़की-हरिद्वार हाईवे पर वाहनों का दबाव लगभग सात प्रतिशत कम हो गया है।गति से प्रगति के जिस उद्देश्य के साथ दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एसेस कंट्रोल हाईवे (इकोनामिक कारिडोर) बनाया गया है, उसके परिणाम दिखने लगे हैं।वाहनों के बोझ से दबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (एनई-3) और मेरठ-रुड़की-हरिद्वार हाईवे (पुराना एनएच-58) पर लगभग सात प्रतिशत वाहन घट गए हैं। इसका कारण है कि दिल्ली से सीधे देहरादून व मसूरी की तरफ जाने वाले वाहन नए हाईवे पर स्थानांतरित होने लगे हैं।दिल्ली से देहरादून जाने वाली ई-बसें भी नए ग्रीनफील्ड हाईवे से गुजरने लगी हैं। दिल्ली, नोएडा व गुरुग्राम की तरफ से आने वाले वाहन फिलहाल हरिद्वार व ऋषिकेश की तरफ वाया मेरठ निकल रहे हैं। जून में हरिद्वार का कनेक्टर भी शुरू जाएगा, जिसके बाद हरिद्वार. ऋषिकेश के वाहन भी दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एसेस कंट्रोल हाईवे पर स्थानांतरित हो सकते हैं।दिल्ली के साथ ही अब मेरठ के लोगों को भी जल्द नए हाईवे का लाभ मिलने वाला है। पहला लाभ यह कि पुराने एनएच-58 पर वाहन घटने से यहां वाहनों की रफ्तार बढ़ जाएगी। दूसरा, मेरठ के लोग भी नए ग्रीनफील्ड हाईवे का उपयोग करके कम समय में देहरादून पहुंच सकते हैं।पुराने मार्ग से देहरादून पहुंचने में 4.30 घंटे लगते हैं, लेकिन शामली-करनाल हाईवे से होते हुए ग्रीनफील्ड हाईवे से 3.20 घंटे में देहरादून पहुंच सकते हैं। गौरतलब है कि गत 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ था।
