उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
गोपालगंज जिले के हजारों गरीब परिवारों के लिए पीएम आवास योजना वरदान साबित हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने यह साबित किया है कि जब योजनाएं प्रभावी ढंग से धरातल पर उतरती हैं, तो वे केवल मकान नहीं बनातीं। वे गरीबों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली की मजबूत नींव भी रखती हैं।पीएम आवास योजना से कोई भी पात्र परिवार वंचित नहीं रहेगा। इसके लिए 2025/26 के लिए 16 हजार 7 सौ 73 का लक्ष्य रखा गया था। इसके विरुद्ध 16 हजार 6 सौ 86 लोगों को स्वीकृति दी गई। इनमें 297 लोगों को पहली किश्त दे दी गई है। आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 में सबसे अधिक 69 प्रतिशत आवासों का निर्माण कार्य हुआ है। डीडीसी गौरव कुमार ने कहा कि कोई भी पात्र परिवार, जो इस योजना के तहत आता है, वंचित नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना 2026 के तहत जिन लोगों ने आवेदन किया है, वे अब ऑनलाइन आसानी से अपना नाम देख सकते हैं। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 1 लाख 20 हजार तथा शहरी परिवारों को 2 लाख 50 हजार तक राशि मिलती है।
मकान बने – 13 हजार 2 सौ 5 निर्माणाधीन – 3 हजार 4 सौ 81
पहली किश्त – 2 सौ 97 लाभार्थियों की मिली
दूसरी किश्त – 6 सौ 50 लाभार्थियों की मिली
तीसरी किश्त – 2 हजार 4 सौ 79 की अभी लंबित है।
{लाभार्थी भारत का नागरिक और स्थायी निवासी होना चाहिए। {परिवार में किसी सदस्य के नाम पहले से पक्का घर नहीं होना चाहिए। {केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग वाले परिवार आवेदन कर सकते हैं। {यदि परिवार का कोई सदस्य आयकर देता है, तो वह पात्र नहीं होगा। {अगर आपके परिवार में किसी की सरकारी नौकरी है, तो आपका परिवार योजना हेतु पात्र नहीं होगा। {पीएम आवास योजना ग्रामीण के आवेदक की वार्षिक आय ₹3 लाख से कम होनी चाहिए। पीएम आवास योजना शहरी के आवेदक की वार्षिक आय ₹6 लाख से कम होनी चाहिए।हथुआ में सबसे ज्यादा तो थावे में सबसे कम पीएम आवास योजना के तहत हथुआ, बैकुंठपुर और कुचायकोट में सबसे ज्यादा मकान बनेंगे। थावे में सबसे कम लक्ष्य है। योजना में उन परिवारों को सबसे पहले शामिल किया जाता है, जिनके पास खुद का पक्का मकान नहीं है। गरीबी रेखा के नीचे या उसके आसपास जीवन यापन करने वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। विधवा महिलाएं, दिव्यांगजन, बुजुर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार भी प्राथमिकता में आते हैं।
