उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो
नई दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित शिव कुटीर में आयोजित “राष्ट्रोत्कर्ष-दिवस महोत्सव” में गोवर्धन मठ, पुरी के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य परमपूज्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं, विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
1) जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी
महाराज वर्तमान में श्री गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर हैं। वे विगत कई दशकों से वेद, उपनिषद, वेदान्त, संस्कृत, सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति तथा आदि शंकराचार्य की गुरु-परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सतत कार्यरत हैं। उनके मार्गदर्शन में वेद संरक्षण, धर्मशिक्षा, गौसंरक्षण, संस्कृत संवर्धन, भारतीय ज्ञान परम्परा के पुनर्जागरण तथा राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना के अनेक अभियान संचालित किए जा रहे हैं। भारत सहित विभिन्न देशों में उन्होंने हजारों धर्मसभाओं एवं प्रवचनों के माध्यम से सनातन दर्शन का प्रचार-प्रसार किया है तथा समाज को आध्यात्मिक, नैतिक एवं राष्ट्रधर्म के प्रति जागरूक करने का कार्य किया है।अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने कहा कि सनातन धर्म सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का शाश्वत मार्ग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जिन चुनौतियों से गुजर रहा है, उनका स्थायी समाधान भारतीय सनातन जीवन-दर्शन में निहित है। उन्होंने सम्पूर्ण विश्व को “सनातन फर्स्ट” का संदेश देते हुए कहा कि मानवता, प्रकृति, नैतिकता एवं आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित जीवन ही विश्व में स्थायी शांति एवं समृद्धि स्थापित कर सकता है। उन्होंने भारत को उसकी सनातन सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से विश्व के मार्गदर्शक राष्ट्र के रूप में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
2) दंडी स्वामी गोविंदानंद सरस्वती जी महाराज
कार्यक्रम में पूज्य दंडी स्वामी गोविंदानंद सरस्वती जी महाराज ने वैदिक दशनामी संन्यास परम्परा के अनुसार जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज को भगवा अंगवस्त्र अर्पित कर दण्ड प्रणाम किया। दण्ड प्रणाम दंडी संन्यास परम्परा में गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण, श्रद्धा एवं वैदिक मर्यादा का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।दंडी स्वामी गोविंदानंद सरस्वती जी महाराज ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य हैं तथा सनातन धर्म, वेद-वेदान्त, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं शंकराचार्य परम्परा के संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत हैं।उनके मार्गदर्शन में 12 वर्षीय “श्री किष्किंधा हनुमद् जन्मभूमि रथ यात्रा” संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य कर्नाटक के पम्पाक्षेत्र–किष्किंधा (अंजनाद्री पर्वत) स्थित भगवान श्री हनुमान की जन्मभूमि के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का पुनर्प्रतिष्ठापन, सनातन संस्कृति का जन-जागरण तथा भगवान श्रीराम एवं भगवान हनुमान के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना है। इस अभियान के अंतर्गत भगवान हनुमान की जन्मभूमि के वैश्विक प्रचार-प्रसार एवं वहाँ भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजनाओं के लिए भी जनजागरण किया जा रहा है।स्वामी गोविंदानंद सरस्वती जी भारतीय ज्ञान परम्परा एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय के प्रबल समर्थक हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में आयोजित “AI Tech Future – Indian Knowledge Systems” सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, भारतीय ज्ञान प्रणाली, संस्कृत भाषा तथा भविष्य की प्रौद्योगिकियों पर व्याख्यान देते हुए नैतिक, उत्तरदायी एवं मानव-केंद्रित तकनीकी विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
वे शंकराचार्य परम्परा, मठाम्नाय महाअनुशासनम्, वैदिक परम्पराओं एवं धार्मिक संस्थाओं की गरिमा के संरक्षण हेतु विभिन्न वैधानिक एवं जन-जागरण अभियानों में भी सक्रिय हैं तथा संविधान एवं कानून के दायरे में धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर अपनी बात रखते रहे हैं।
3) राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन एवं श्री सोहन गिरी
कार्यक्रम में राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सोहन गिरी ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक पारंपरिक मणिपुरी अंगवस्त्र।
मणिपुर के अमर स्वतंत्रता सेनानी मेजर पौना ब्रजबासी के जीवन, वीरता एवं बलिदान पर आधारित पुस्तिका भेंट की, जिन्होंने वर्ष 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। साथ ही राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन का आधिकारिक प्रतीक-चिह्न तथा संगठन के राष्ट्रीय जन-जागरण अभियान “हर घर वराह भगवान” की नाम-पट्टिका भी भेंट स्वरूप अर्पित की गई।
वर्ष 2018में स्थापित राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, सेवा एवं जन-जागरण के उद्देश्य से पूरे भारत में कार्यरत है। संगठन समय-समय पर भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों तथा अन्य संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को राष्ट्रीय एवं जनहित के विषयों पर ज्ञापन, सुझाव एवं अभ्यावेदन प्रेषित करता है। प्रधानमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों को भी ई-मेल एवं अन्य संवैधानिक माध्यमों से जनहित संबंधी विषयों से अवगत कराया जाता है।
संगठन पिछले लगभग चार वर्षों से मणिपुर में स्थायी शांति, सामाजिक सौहार्द, विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास तथा राज्य में पुनः विकास और सामान्य जनजीवन की बहाली के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। इस विषय में संगठन द्वारा अनेक ज्ञापन एवं सुझाव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा संबंधित प्राधिकारियों को भेजे गए हैं तथा संवाद एवं संवैधानिक समाधान पर बल दिया गया है।
संगठन का साप्ताहिक प्रकाशन “वार्तापत्रम्” राष्ट्रहित, सामाजिक जागरूकता एवं सकारात्मक परिवर्तन के उद्देश्य से प्रकाशित किया जाता है। इसके माध्यम से देशभर के जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं नागरिकों तक राष्ट्रहित एवं जनहित के विषय पहुँचाए जाते हैं। साथ ही भारत के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में शिक्षा, विज्ञान, रक्षा, कृषि, चिकित्सा, खेल, साहित्य, कला, संस्कृति, समाजसेवा, आध्यात्मिक क्षेत्र, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व तथा अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली उन विभूतियों की पहचान एवं सम्मान के लिए भी अभियान संचालित किया जाता है, जिनका जीवन, चरित्र, संघर्ष एवं राष्ट्रसेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
“वार्तापत्रम्” के माध्यम से ऐसे योग्य व्यक्तियों के नाम पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किए जाने वाले अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नागरिक सम्मानों एवं पुरस्कारों हेतु संबंधित मंत्रालयों एवं सक्षम प्राधिकारियों को अनुशंसित किए जाने का प्रयास किया जाता है, ताकि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली प्रेरणादायी प्रतिभाओं को उचित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो सके।,कार्यक्रम का समापन,कार्यक्रम के समापन से पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने देशभर से आए श्रद्धालुओं, संतों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा पूछे गए आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व के अनेक प्रश्नों का अत्यंत सरल, शास्त्रसम्मत एवं तर्कपूर्ण उत्तर दिया। उन्होंने सनातन धर्म, वेदान्त, गुरु-शिष्य परम्परा, राष्ट्रधर्म, पारिवारिक जीवन, युवा पीढ़ी की भूमिका तथा वर्तमान समय की चुनौतियों से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। उनके उत्तरों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक दृष्टि, आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा एवं सनातन मूल्यों के प्रति नई प्रेरणा प्रदान की।अंत में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने समस्त राष्ट्रवासियों, सनातन समाज एवं विश्व मानवता के कल्याण, भारत की समृद्धि, सामाजिक समरसता और विश्व शांति के लिए मंगलाशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन वैदिक मंगलकामनाओं एवं भारत को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक रूप से विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ।

