उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
वीडियो में एक शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे अपने डॉग को घाट के अंदर नहीं बल्कि अलग से किसी दूसरी जगह पर नहलाए। डॉग को नहला रही महिला गुस्से में वहां मौजूद लोगों काफी कुछ कह देती हैं।हरिद्वार के गंगा घाट पर पालतू डॉग को नहलाने का मामला सामने आया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसने यूजर्स के बीच ये बहस छेड़ दी है क्या पवित्र स्थान पर डॉग को नहलाना सही है या गलत?मामला श्रद्धानंद घाट का बताया जा रहा है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में एक महिला अपने पालतू डॉग को नहलाते हुए नजर आ रही है। इस दौरान जब वहां मौजूद श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया, तो महिला उनसे ही भिड़ गई और फिर जमकर बहस हुई। वीडियो में एक शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वे अपने डॉग को घाट के अंदर नहीं बल्कि अलग से किसी दूसरी जगह पर नहलाए। डॉग को नहला रही महिला गुस्से में वहां मौजूद लोगों काफी कुछ कह देती हैं।महिला ने गुस्से में क्या कहा?इस दौरान महिला डॉग को नहाने से रोकने वाले लोगों से गुस्से में कहती हैं कि अगर मैंने सच्चे मन से भगवान की पूजा की है तो सबको सजा मिलेगी। महिला आगे कहते है कि आप ये दिन और समय जरूर याद रखना। इस दौरान महिला के परिजन उन्हें संभालते हैं और मामला शांत कर तत्काल किसी अन्य जगह पर ले जाते हैं। इस दौरान वहां मौजूद एक शख्स ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने कैमरे में कैद कर लिया। यह मामला कब का है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।वहां मौजूद लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के तर्क,महिला की इस हरकत का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि घाट पर श्रद्धालु बड़े ही आस्था के साथ नहाने आते हैं और डॉग को इस तरह धार्मिक स्थान पर नहलाना सही नहीं। वहीं कुछ ने इसे घाट की पवित्रता के साथ खिलवाड़ बताया। सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। किसी ने महिला को सही बताया तो किसी ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों को सही बताया।तीर्थ पुरोहित ने क्या कहा?तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए इसकी घोर निंदा की है। उनका कहना है कि मां गंगा और उनका पावन जल केवल एक नदी मात्र नहीं, बल्कि हमारी अटूट आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक हैं, उन्हें साक्षात देवी का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म की हर पूजा पद्धति और पवित्र अनुष्ठान में गंगाजल अनिवार्य है। ऐसे में पशु प्रेम के नाम पर डॉग को गंगा में नहलाना और टोकने पर लोगों से उलझना न केवल अनुचित है, बल्कि घोर अज्ञानता को भी दर्शाता है।
