उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
धर्मनगरी हरिद्वार में बढ़ते शहरीकरण के बीच गायब होती हरियाली और पेड़ों की घटती संख्या चिंता बढ़ा रही है। हरिद्वार वन प्रभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न श्रेणियों में 31 हजार से अधिक पेड़ कटान, पातन और कार्ययोजना के तहत समाप्त हुए हैं।इनमें अनुमति लेकर काटे गए हरे पेड़, सूखे व उखड़े पेड़ों का पातन, कार्ययोजना श्रेणी कटान तथा खतरा बने पेड़, सड़क व विकास कार्यों में हटाए गए पेड़ शामिल हैं। ऐसे में आज हरेला पर्व पर पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि धर्मनगरी में दशकों में तैयार हुए पेड़ों को बचाने का संकल्प लेने की जरूरत है।हरे थे सभी पेड़,हरिद्वार वन प्रभाग से दैनिक जागरण को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी में वर्ष 2025-26 में वन प्रभाग के अंतर्गत गैर वन (नाप) भूमि पर सेमल, शीशम, सागौन, तून सहित विभिन्न प्रजातियों के 826 हरे पेड़ों को विधिवत अनुमति लेकर काटा गया। ये सभी पेड़ हरे थे। इसके अतिरिक्त सूख चुके अथवा उखड़े हुए हरे पेड़ों के पातन की कार्रवाई भी बड़े पैमाने पर हुई।इस श्रेणी में 2697 पेड़ों का पातन किया गया, जो हरिद्वार रेंज के पथरी-1 पश्चिमी बीट क्षेत्र से संबंधित हैं। इन पेड़ों में अर्जुन, खैर, शीशम, सागौन, तुन, गोलमोहर, बहेड़ा, गुल्लर सहित आदि प्रजाति के हैं। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2025-26 में वर्किंग प्लान) के तहत 27 हजार से अधिक यूकेलिप्टस के पेड़ों का भी कटान किया गया।
