
*~ हिन्दू पंचांग ~*

*दिनांक -19 अप्रैल 2024*
*दिन – शुक्रवार*
*विक्रम संवत – 2081 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार – 2080)*
*शक संवत -1946*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – ग्रीष्म ॠतु*
*अमांत – 6 गते वैशाख मास प्रविष्टि*
*राष्ट्रीय तिथि – 30 फाल्गुन मास*
*मास – चैत्र*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – एकादशी रात्रि 08:04 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*नक्षत्र – मघा सुबह 10:57 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*योग – वृद्धि 20 अप्रैल रात्रि 01:45 तक तत्पश्चात ध्रुव*
*राहुकाल – सुबह 10:40 से दोपहर 12:16 तक*
*सूर्योदय- 05:46*
*सूर्यास्त- 18:47*
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
*व्रत पर्व विवरण – कामदा एकादशी,ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ*
*विशेष – *
*हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
*आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
*एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
*एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
*जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*कामदा एकादशी*
*19 अप्रैल, शुक्रवार को कामदा एकादशी है।*
*‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है । इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है ।*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*ग्रीष्म ऋतु में स्वास्थ्य – सुरक्षा*
*19 अप्रैल 2024 शुक्रवार से ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ ।*
*ग्रीष्म ऋतु में शरीर का जलीय व स्निग्ध अंश घटने लगता है | जठराग्नि व रोगप्रतिकारक क्षमता भी घटने लगती है | इससे उत्पन्न शारीरिक समस्याओं से सुरक्षा हेतु नीचे दी गयी बातों का ध्यान रखें –*
*१] ग्रीष्म ऋतु में जलन, गर्मी, चक्कर आना, अपच, दस्त, नेत्रविकार ( आँख आना / Conjunctivitis ) आदि समस्याएँ अधिक होती हैं | अत: गर्मियों में घर में बाहर निकलते समय लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा बाँधे अथवा टोपी पहने तथा एक गिलास पानी पीकर निकलें | जिन्हें दोपहिया वाहन पर बहुत लम्बी मुसाफिरी करनी हो वे जेब में एक प्याज रख सकते हैं |*
*२] उष्ण से ठंडे वातावरण में आने पर १० – १५ मिनट तक पानी न पियें | धूप में से आने पर तुंरत पूरे कपड़े न निकालें, कूलर आदि के सामने भी न बैठें | रात को पंखे, एयर – कंडिशनर अथवा कूलर की हवा में सोने की अपेक्षा हो सके तो छत पर अथवा खुले आँगन में सोयें | यह सम्भव न हो तो पंखे, कूलर आदि की सीधी हवा न लगे इसका ध्यान रखें |*
*शेष कल….*