उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
उम्र कोई भी हो, डंडा अब मजबूरी; बच्चों से बुजुर्गों तक में दहशत, राहगीरों पर अचानक हमला कर रहे कुत्तेचमोली जिले के नारायणबगड़ बाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों लोगों के हाथों में डंडे आम नजर आ रहे हैं। यह कोई परंपरा नहीं, बल्कि आवारा और हिंसक कुत्तों के बढ़ते आतंक से बचने की मजबूरी है। बाजार आने वाले बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक के हाथों में डंडा दिखाई दे रहा है। लोगों के दिल में कुत्तों के हमले का डर इस कदर बैठ गया है कि अकेले बाजार आने-जाने में भी लोग घबरा रहे हैं।विगत कुछ दिनों से नारायणबगड़ विकासखंड क्षेत्र में पागल कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। कुत्ते अचानक बाजार और संपर्क मार्गों पर पहुंचकर राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। इससे व्यापारियों, ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और बाजार आने-जाने वाले लोगों में भय का माहौल है। हालात यह हैं कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए हाथों में डंडा लेकर चलने को मजबूरी है,स्थानीय लोगों के अनुसार कुत्तों के झुंड अचानक लोगों के पीछे दौड़ पड़ते हैं और कई बार हमला करने की कोशिश करते हैं। इस कारण बाजार क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
8 से 10 कुत्तों को पकड़कर किया रेस्क्यू
कुत्तों के बढ़ते आतंक को देखते हुए वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब आठ से दस कुत्तों को पकड़कर रेस्क्यू किया है। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से भी लगातार अभियान चलाकर कुत्तों को इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर कुत्तों के उपचार और नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोग समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।
जल्द निजात दिलाने की मांग
नारायणबगड़ के ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने कहा कि क्षेत्र में कुत्तों के आतंक से दहशत का माहौल बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग और पशुपालन विभाग से जल्द प्रभावी कार्रवाई करने और हिंसक कुत्तों से आमजन को निजात दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुत्तों का उपचार और आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी की जाए, ताकि लोगों के बीच बना डर खत्म हो सके।भाजपा मंडल नारायणबगड़ के कमलेश सती और जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र कैनेडी ने भी कुत्तों के आतंक पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बाजार आने से डर रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं समेत हर वर्ग में कुत्तों के हमले का भय बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से बाजार और आबादी वाले क्षेत्रों में अभियान चलाकर हिंसक कुत्तों को नियंत्रित करने तथा लोगों को सुरक्षा देने की मांग की है।
डंडा बना सुरक्षा का सहारा
नारायणबगड़ बाजार की मौजूदा तस्वीर क्षेत्र में बने भय को बयां कर रही है। उम्र चाहे 10 साल हो या 70 साल, बाजार आने वाले कई लोगों के हाथ में डंडा नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंडा लेकर चलना उनकी कोई आदत या परंपरा नहीं, बल्कि कुत्तों के अचानक हमले से बचने की मजबूरी बन गई है।
