
उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
पिथौरागढ़ में पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने किया जटिल ऑपरेशन, गर्भाशय के गंभीर संक्रमण से पीड़ित स्वान की हालत में सुधार
पिथौरागढ़। दस दिन से खाना छोड़ चुके 15 वर्षीय स्वान की हालत गंभीर होने पर पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने उसका जटिल ऑपरेशन कर उसे राहत दिलाई। जांच में स्वान के पायोमेट्रा नामक गंभीर संक्रमण से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। घंटों चले जटिल ऑपरेशन के बाद स्वान की स्थिति में सुधार हुआ है और अब उसे स्वस्थ बताया जा रहा है।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश शर्मा के निर्देशन में चलाए गए इस उपचार अभियान में वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज जोशी और सचल पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रेमलता बसेड़ा के नेतृत्व में टीम ने कार्य किया। पशु सर्जन डॉ. कनिका पाण्डेय ने स्वान का ऑपरेशन किया।डॉ. कनिका पाण्डेय के अनुसार, स्वान पिछले दस दिनों से कुछ भी नहीं खा रहा था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय जांच कराई गई, जिसमें पायोमेट्रा की पुष्टि हुई। यह बीमारी मादा कुत्तों के गर्भाशय में होने वाला गंभीर संक्रमण है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन जरूरी हो गया था।
घंटों चला जटिल ऑपरेशन
स्वान की स्थिति को देखते हुए पशु चिकित्सा टीम ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। इसके बाद चिकित्सकों ने घंटों तक चली सर्जरी के माध्यम से उसका उपचार किया। ऑपरेशन सफल रहने के बाद स्वान की हालत में सुधार आया। गंभीर बीमारी और लंबे समय से भोजन नहीं कर पाने के कारण चुनौतीपूर्ण बनी इस स्थिति में चिकित्सकीय टीम के प्रयास से उसे राहत मिली।डॉ. कनिका पाण्डेय ने ऑपरेशन में सहयोग देने वाले सहायक स्टाफ का आभार जताया। उन्होंने टीम के समन्वित प्रयासों को सफल उपचार में महत्वपूर्ण बताया।
समय पर उपचार जरूरी
पायोमेट्रा मादा कुत्तों में होने वाला गर्भाशय का गंभीर संक्रमण है। इसके लक्षणों में सुस्ती, भूख न लगना, उल्टी, अधिक प्यास लगना और कभी-कभी योनि से असामान्य स्राव शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में बाहरी स्राव दिखाई नहीं देता, जिससे बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।पिथौरागढ़ में 15 वर्षीय स्वान का सफल ऑपरेशन पशु चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मामले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पशुओं में गंभीर बीमारी के लक्षण दिखने पर समय पर जांच और उचित उपचार उनकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

