उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
नंदकेसरी-कोठी के बीच लगातार दरक रही पहाड़ी, सोल घाटी से लेकर देवाल-मेलखेत मार्ग तक सड़क बेहाल: ग्रामीण परेशान
थराली!पहाड़ में बारिश केवल रास्ते नहीं रोक रही, बल्कि ग्रामीणों की जिंदगी की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा रही है। चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच जगह-जगह भूस्खलन से सड़कें बाधित हैं। थराली-देवाल मोटर मार्ग पर नंदकेसरी और कोठी के बीच भारी भूस्खलन ने आवाजाही को मुश्किल बना दिया है। पिछले कुछ दिनों से यहां पहाड़ी दरकने का सिलसिला जारी है। ऐसे में सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों पर खतरा मंडरा रहा है।स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इस मार्ग का कोई व्यवहारिक वैकल्पिक रास्ता नहीं है। सड़क पर भूस्खलन होने के बावजूद ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए जोखिम उठाकर इसी मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। बारिश के दौरान पहाड़ी से लगातार मलबा और पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है।सोल घाटी का संपर्क भी प्रभावित,थराली, देवाल और नारायणबगड़ क्षेत्र में बारिश के साथ भूस्खलन की समस्या लगातार बढ़ रही है। सोल घाटी को जोड़ने वाला मुख्य मोटर मार्ग भी कई स्थानों पर भूस्खलन की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क की स्थिति खराब होने के कारण घाटी के ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
देवाल-मेलखेत मार्ग पर कई दिनों से परेशानी
वहीं, देवाल विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्रों को ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ने वाले देवाल-मेलखेत मोटर मार्ग पर सियालकोट के समीप भारी भूस्खलन होने से मार्ग कई दिनों से आवाजाही के लिए बाधित है। सड़क बंद होने के कारण ग्रामीण पैदल रास्तों का सहारा लेने को मजबूर हैं। कई लोगों को लंबी दूरी तय कर दुर्गम और जोखिम भरे पहाड़ी रास्तों से देवाल ब्लॉक मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है।हजारों की आबादी पर बारिश की दोहरी मारसड़कों के बार-बार बंद होने से इन क्षेत्रों की हजारों की आबादी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि बाजार, अस्पताल, स्कूल और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने की मुख्य कड़ी है। ऐसे में सड़क बाधित होने का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।हर बरसात में भूस्खलन के बाद सड़क खोलने की कवायद शुरू होती है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक अस्थायी समाधान के भरोसे ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे? स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों का स्थायी उपचार किया जाना जरूरी है। केवल मलबा हटाकर यातायात बहाल करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से भूस्खलन प्रभावित स्थानों का स्थायी उपचार कराने, सड़क को सुरक्षित बनाने और बंद मार्गों पर शीघ्र आवाजाही बहाल कराने की मांग की है।
