
उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
–दिल्ली पुलिस की बर्बरता मुस्लिम महिला पत्रकारों पर अत्याचार और गुंडों को सत्ता का संरक्षण देने के खिलाफ प्रदर्शन
देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी दून में सीआईटीयू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस )के बैनर तले हज़ारों श्रमिकों, कर्मचारियों, महिलाओं और छात्रों ने दिल्ली पुलिस की अमानवीय बर्बरता, महिला मुस्लिम ,पत्रकारों पर और सत्तारूढ़ दिग्गज नेताओं को मिल रहे कथित संरक्षण के खिलाफ ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने सीटू कार्यालय से राजपुर रोड तक जलूस निकाला, जिसमें में मजदूर, छात्र और महिलाएँ शामिल हुईं। इस दौरान नारे गूंजते रहे, तानाशाही नहीं चलेगी, जनता की सरकार चलेगी”,दलित छात्रा निशु के पिता को जान से मारने की नीयत से बीजेपी के गुंडों द्वारा हमला किया गया उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा बचाया जा रहा है स्वतंत्र भारद्वाज के अलावा अन्य हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की गई ।इस अवसर पर दलितों के ऊपर सरकारी संरक्षण में हमले बंद करो एवरो को गिरफ्तार करो, पत्रकार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, गृहमंत्री मुर्दाबाद, दिल्ली पुलिस बर्बरता मुर्दाबाद।इस दौरान कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया और स्पष्ट संदेश दिया कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग पुलिस का दुरुपयोग करके जनता को कुचलना चाहते हैं, परंतु जनता अब चुप नहीं बैठेगी।प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने करारा प्रहार किया -“निशु के पिताजी” पर हुए जानलेवा हमले के आरोपियों को पुलिस संरक्षण और सार्वजनिक बयानों के ज़रिए राजनीतिक छत्रछाया दी जा रही है। यह न्यायपालिका का खुला अपमान है और कानून के शासन पर थूकने जैसा है।पत्रकार नफीसा, वरिष्ठ पत्रकार साहिन खान और अन्य पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बर्बर पिटाई ने देश के लोकतंत्र को शर्मसार किया है। वक्ताओं ने कहा –”अगर पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? यह पुलिस राज नहीं, लोकतंत्र की हत्या है।”गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी नेताओं को कानून से ऊपर मानकर उन्हें संरक्षण देना संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक दोषी चाहे कितना भी बड़ा हो, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक देश में न्याय की मौत होगी।
प्रदर्शन में उठाई गई चार सूत्री माँगें :
-निशु के पिताजी के हमलावरों एवं सभी पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित एवं स्वतंत्र न्यायिक जाँच (सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट की निगरानी में) हो।
-दिल्ली पुलिस के दोषी अधिकारियों (पिटाई में शामिल) के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई एवं कठोरतम कानूनी दंड सुनिश्चित किया जाए।
-गृह मंत्रालय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि किस आधार पर आरोपियों को पुलिस संरक्षण दिया गया – यदि उत्तर संतोषजनक नहीं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो।
-शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की बाधा, गिरफ्तारी या अत्याचार को तुरंत रोका जाए और प्रदर्शनकारियों को अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता की रक्षा को आंदोलन करेंगे ।
प्रदर्शन में सीटू के जिला महामंत्री लेखराज , अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली , सीटू के जिला अध्यक्ष एस.एस.नेगी , उपाध्यक्ष भगवंत पायल , कृष्ण गुनियाल ,अभिषेक भंडारी ,हिमांशु चौहान , रवींद्र नौडियाल, बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश , नितिन बौंठियाल ,मोनिका एस.एफ.आई के प्रांतीय महामंत्री शैलेन्द्र परमार आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे ।

