उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
मार्केटिंग..फोटो…महत्वपूर्ण देहरादून,वरिष्ठ संवाददाता। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसरश्री महंत इन्दिरेश अस्पताल पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर के कारणों पर शोध करेगा । उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों से भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस पर व्यापक वैज्ञानिक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है। अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार गर्ग के असानुर शोध का मुख्य उद्देश्य मरीजों में कैंसर के पीछे छिपे जोखिम कारकों जैसे तंबाकू शराब, अत्यधिक गर्म चाय/भोजन, पोषण की कमी, एसिड रिफ्लक्स और पर्यावरणीय परिस्थितियों की भूमिका का व्यवस्थित अध्ययन करना है।यहां एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन, कीमोथेरेपी और दूरबीन विधि (मिनिमली इनवेसिव सर्जरी) जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टरों ने सचेत किया कि निगलने में कठिनाई, वजन कम होना और छाती में जलन जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। शोध के निष्कर्ष भविष्य में प्रभावी कैंसर नियंत्रण नीति बनाने और जन-जागरूकता में मददगार साबित होंगे। वरिष्ठ कैंसर सर्जन डा. अजीत तिवारी ने बताया कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा, दर्द नियंत्रण, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं उपलब्ध हैं। वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. निशांत सिन्हा ने बताया कि चयनित मरीजों में भोजन नली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि, अर्थात् मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी से भी किया जाता है। इसमें छाती और पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे छेदों के माध्यम से सर्जरी की जाती है।वरिष्ठ गाइनी कैंसर सर्जन डाॅ यामिनी कंसल ने कहा कि किसी भी कैंसर की शीघ्र पहचान अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
